Saturday, February 27, 2010

आईएएस अफसरों की गुटबाजी चरम पर

अश्लील पर्चे ने बिगाड़ा माहौल
कई अधिकारी शक के दायरे में




रवीन्द्र जैन

भोपाल। मध्यप्रदेश में कई आईएएस अधिकारियों की गुटबाजी चरम पर पंहुच गई है। दो दिन पहले निकले एक अश£ील और आपत्तिजनक पर्चे ने माहौल को और खराब कर दिया है। मंत्रालय में अधिकार ही एक दूसरे को शंका की नजर से देख रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अपील का अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है। क्या वाकई प्रदेश की आईएएस लॉबी डिप्रेशन में है। स्थिति यह है कि

प्रदेश में पहली बार दस महिने में छह आईएएस अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं तथा पिछले छह साल में 17 आईएस अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त संगठन भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट में चालान पेश कर चुका है। राज्य के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ।

मप्र में नए मुख्य सचिव का चयन व प्रमुख सचिव अरविन्द जोशी व टीनू जोशी के घर मिले तीन करोड़ से अधिक की राशि के बाद प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की गुटबाजी सतह पर आ गई है। दो दिन पहले निकले एक बेनामी पर्चे ने गुटबाजी को बढ़ावा दे दिया है। इस पर्चे के जरिए 133 आईएएस अधिकारियों पर कीचड़ उछालने का प्रयास किया गया है। इन अफसरों को भ्रष्ट, महाभ्रष्ट, अय्याश जैसी श्रेणियों में बांटते हुए उनकी अवैध कमाई को कहां इंवेस्ट किया गया है, यह बताने का प्रयास किया गया है। पर्चे में ऐसे अधिकरियों के नाम दिए गए हैं जिन्हें मप्र में ईमानदार माना जाता है तथा उनकी छवि उज्जवल है। खास बात यह है कि पर्चे में ज्यादातर नाम सीधी भर्ती के आईएएस अधिकारियों के हैं। पर्चे में लगभग आधा दर्जन से अधिक महिला आईएएस अधिकारियों के चरित्र पर उंगली उठाई गई है।

बताया जाता है कि मुख्य सचिव अवनि वैश्य एवं पुलिस महानिदेशक एसके राउत के पास यह पर्चा पहुंच गया है, तथा उन्होंने अपने अपने स्तर पर इसे निकालने वाले के बारे में खोज शुरू कर दी है। बताया जाता है कि इस पर्चे के पीछे उन अधिकारियों का दिमाग बताया जा रहा है जो पिछले दिनों मीडिया के कुछ लोगों के साथ मिलकर अपनी पसंद का मुख्य सचिव बनवाना चाहते थे। सूत्रों के अनुसार पुलिस विभाग की फोन टेपिंग मशीन से कुछ संदिग्ध अधिकारियों के फोन एवं मोबाइल टेप किए जा रहे हैं ताकि इन पर्चों के पीछे किसका दिमाग काम कर रहा है, इसका पता लगाया जा सके।

सबसे बदनाम कैडर

आईएएस अधिकारियों के लिए इस वक्त मध्यप्रदेश सबसे बदनाम कैडर बन गया है। मप्र में पिछले दस महिनों में छह आईएएस अधिकारी निलंबित हो चुके हैं। प्रदेश के इतिहास में कितने अधिकारी कभी सस्पेंड नहीं हुए।

अब तक छह : -

ज्ञानेश्वर पाटिल : 18 जून 2009 को भोपाल के जिला पंचायत कार्यालय में युवा आईएएस अधिकारी ज्ञानेश्वर पाटिल को मीडिया एवं पुलिस ने एक युवक का दैहिक शोषण करते रंगे हाथ पकड़ा था। स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पाटिल के आपत्तिजनक फुटेज टीवी पर देख कर उन्हें निलंबति किया था, लेकिन इस अधिकारी को बिना सजा दिए बहाल कर दिया गया है।

केपी राही : टीकमगढ़ कलेक्टर केपी राही को नरेगा में भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया है। वे अभी भी निंलबित हैं। बताया जाता है कि भिण्ड एवं टीकमगढ़ कलेक्टरों पर एक जैसे आरोप थे, लेकिन तत्कालीन मुख्यसचिव ने भिण्ड कलेक्टर सुहेल अली को बचा लिया और केपी राही को निलंबित कर दिया। नए मुख्यसचिव ने सुहेल अली की फाइल बुलाई है उम्मीद की जा रही है कि सुहेल अली के खिलाफ कभी भी कार्रवाही हो सकती है।

अंजू सिंह बघेल : आईएएस अधिकारी अंजूसिंह बघेल को भूमि माफिया को मदद के आरोप में निलंबित किया गया है। वे अभी भी निलंबित हैं।

जोशी दम्पत्ति : प्रमुख सचिव अरविन्द जोशी एवं प्रमुख सचिव टीनू जोशी के घर पर आयकर छापे में तीन करोड़ रुपए से अधिक की राशि मिलने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। आयकर विभाग उनका प्रकरण सीबीआई को सौंपने की तैयारी कर रहा है।

राजेश राजौरा : वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश राजौरा को भी राज्य सरकार ने आयकर विभाग की रिपोर्ट मिलने के बाद निलंबित कर दिया है। आयकर विभाग ने उनके घर दो साल पहले छापा मारा था। उन पर स्वास्थ विभाग के आयुक्त के रुप में भारी भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं।



17 आईएएस के खिलाफ चालान

- मध्यप्रदेश लोकायुक्त संगठन में 1 जनवरी 2004 के बाद अभी तक 17 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में कोर्ट में चालान पेश कर चुका है। यह अभी तक कि सबसे बड़ी संख्या है।

36 आईएएस लोकायुक्त जांच के दायरे में

मध्यप्रदेश लोकायुक्त वर्तमान में प्रदेश के लगभग 36 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रहा है। इसे भी बड़ी संख्या माना जा रहा है।

25 आईएएस ईओडब्ल्यू जांच के दायरे में

मप्र के लगभग 25 आईएएस अधिकारियों की जांच मप्र आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो कर रहा है। वैसे इस संस्था से किसी आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाही कह उम्मीद कम ही है। अभी तक यह संस्था राजनतेाओं के हथियार के रुप में प्रयोग में लाई जाती है। क्योंकि इसकी जांच पर हमेशा ही उंगली उठती रही है।

प्रतिनियुक्ति पर जाने का प्रयास : ऐसी स्थिति में मप्र के कई आईएएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर प्रदेश से बाहर जाने का मन बना रहे हैं। कई अधिकारियों ने नियमों का हवाला देकर फाइलों को लटकाना शुरू कर दिया है।

Friday, February 26, 2010

अरविन्द जोशी को क्यों चाहिए काली डायरी ?






रवीन्द्र जैन

भोपाल। मध्यप्रदेश के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी पिछले दो दिन से भोपाल शहर में एक विशेष प्रकार की डायरी ढूंढ रहे हैं। वे स्वयं नए व पुराने भोपाल की स्टेशनरी की दूकानों की खाक छान रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें वैसी डायरी नहीं मिली है जिसकी वे तलाश कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि जोशी के घर में मिली किसी डायरी को बदलने के प्रयास हो रहे हैं।

भरोसेमंद सूत्रों के अुनसार जोशी को वल्लारपुर पेपर मिल की एक काले रंग की डायरी की तलाश हैं जिसे शॉट में बेल्ट की डायरी कहा जाता है। जोशी स्वयं यह डायरी खोजने बाजार में घूम रहे हैं, इससे अंदाज लगाया जा रहा है कि - नई डायरी के जरिए किसी पुरानी डायरी के रहस्य को दफन करने की तैयारी है।
खबर का असर

विधानसभा में वित्तमंत्री ने मांगी माफी

राजनीतिक संवाददाता

भोपाल। गुरुवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत बजट में एक बड़ी गलती के लिए वित्तमंत्री राघवजी ने शुक्रवार को न केवल उसमें सुधार किया, बल्कि सदन में इस भूल के लिए खेद भी व्यक्त किया। इस भूल को सबसे पहले राज एक्सप्रेस ने सबके सामने रखा था। कांग्रेस का आरोप था कि वित्तमंत्री ने प्रदेश की छह करोड़ जनता को भ्रमित किया है, इसलिए वे खेद भी व्यक्त करें। राघव जी ने बिना संकोच के अपनी गलती के लिए प्रदेश की जनता से खेद भी व्यक्त कर दिया।

दरअसल गुरूवार को वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में प्रदेश के विकास के लिए 150 करोड़ रुपए एकत्रित करने के लिए वेट अधिनियम की अनुसूची 3 में अर्शित आयटमों पर वेट की दर 12.5 से बढ़ाकर 13 प्रतिशत करने की बात कही थी। राज एक्सप्रेस ने इस भूल को पकड़ा और बताया कि - वेअ अधिनियम की अनुसूची 3 को 21 मार्च 2006 को ही संशोधित कर विलोपित किया जा चुका है। ऐसे में वित्तमंत्री 150 करोड़ रुपए कहां से लाएंगे।

शुक्रवार को बजट भाषण पर चर्चा प्रारंभ करते हुए कांग्रेस विधायक डा. गोविन्द सिंह ने इस भूल की ओर इशारा करते हुए कहा कि वित्तमंत्री की इस गलती ने राज्य की छह करोड़ जनता को भ्रम में रखा है। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री को अपनी गलती के लिए खेद व्यक्त करना चाहिए। कांग्रेस की मांग पर वित्तमंत्री राघव जी उठे और उन्होंने कहा कि यह भूल बजट भाषण में प्रिटिंग की गलती के कारण हुई है। उन्होंने सुधार करते हुए कहा कि वेट अधिनियम की अनुसूची दो में जिन वस्तुओं पर 12.5 प्रतिशत वेट लगता है उसे 13 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने भूल के लिए ह्दय से खेद भी व्यक्त कर दिया। स्पीकर ने भी इस संशोधन को स्वीकार कर लिया।
वित्तमंत्री कैसे कर गए इतनी बड़ी गलती?

डेढ़ सौ करोड़ कहां से लाएंगे










रवीन्द्र जैन

भोपाल। मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री राघव जी भाई अपने बजट भाषण में एक बड़ी गलती कर गए हैं। उन्होंने अपने बजट भाषण में प्रदेश के विकास कार्यों हेतु वित्तीय संसाधन जुटाने वेट अधिनियम की अनुसूची 3 में दर्शाइ गई कर योग्य वस्तुओं पर वेट की दर 12.5 से बढ़ाकर 13 प्रतिशत करने की बात कही है। इससे राज्य सरकार के खजाने में 150 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने का अनुमान लगाया है। जबकि स्वयं राघव जी 31 मार्च 2006 को मप्र वेट अधिनियम 2002 को संशोधित कर अनुसूची 3 को विलोपित कर चुके हैं। राज एक्सप्रेस ने वित्तमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया तो उन्होंने अपनी गलती मानते हुए शुक्रवार को इसे संशोधित करने की बात कही है।

सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के आईएएस अधिकारियों को डिप्रेशन से बाहर आने का आव्हान किया था। मुख्यमंत्री का मानना है कि आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी दम्पत्ति के घर आयकर के छापे में तीन करोड़ रुपए मिलने के बाद प्रदेश के सभी अधिकारी डिप्रेशन में हैं। गुरूवार को मप्र विधानसभा में प्रस्ततु बजट में अधिकारियों का डिप्रेशन साफ दिखाई दिया। वित्तमंत्री के बजट भाषण में वेट अधिनियम की विलोपित हो चुकी अनुसूची 3 का उल्लेख करा दिया गया। राज एक्सप्रेस ने इस भूल की जानकारी वित्तमंत्री को दी। अधिकारियों से चर्चा के बाद वित्तमंत्री ने राज एकसप्रेस को बताया कि - वेट अधिनियम की अनुसूची दो की वस्तुओं पर वेट की दर बढ़ाने जा रहे हैं, इस संबंध में कल संशोधन कर दिया जाएगा। वेट अधिनियम की अनुसूची दो में जितनी भी वस्तुओं का उल्लेख किया गया है उसमें टिम्बर को छोड़कर सभी पर वेट की दर 4 व 5 प्रतिशत दर्शाई गई है। लेकिन अधिनियम के अंत में एक लाईन जोड़ी गई है कि जिन वस्तुओं का उल्लेख अनुसूची दो में नहीं है उनके अलावा सभी वस्तुओं पर वेट की दर 12.5 प्रतिशत मानी जाएगी। यानि राज्य सरकार ने गुरूवार को जिन वस्तुओं पर वेट बढ़ाया है उनका उल्लेख भी वेट अधिनियम की अनुसूची दो में नहीं है।



इनका कहना है :

- यह प्रिटिंग की गलती से हुआ है। हम शुक्रवार को इसे विधानसभा में संशोधित कर देंगे।

राघव जी भाई
वित्तमंत्री, मप्र शासन

- अनुमन बजट में इस तरह की गलती नहीं होना चाहिए। विधानसभा में अपनी इस गलती को सुधारने के साथ वित्तमंत्री को सदन के सामने खेद भी व्यक्त करना चाहिए।

विश्वेन्द्र मेहता
पूर्व सचिव, मप्र विधानसभा

Wednesday, February 24, 2010

संसदीय कार्य मंत्री पर भारी कांग्रेस के उपनेता

नरोत्तम मिश्रा लखपति


राकेश चौधरी करोड़पति

राकेश अग्रिहोत्री

भोपाल। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कांग्रेस नेताओं की सम्पत्ति प्रदेश के मंत्रियों की तुलना में कई गुना है। ऐसा नहीं है कि उनके पास यह सम्पत्ति बहुत पहले थी। कई नेताओं ने मंत्री विधायक बनने के बाद यह सम्पत्ति बनाई है। हमने पहली किश्त में बताया था कि सम्पत्ति के मामले में मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी भारी हैं। इस बार हम बताने जा रहे हैं कि कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की सम्पत्ति राज्य के संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा से कई गुना है।

राकेश सिंह ने मप्र विधानसभा में 31 अक्टूबर 2002 को पहली बार मंत्री के रुप में अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा विधानसभा के पटल पर रखा था। उस समय उनकी एवं उनकी पत्नि के सम्पत्ति का ब्यौरा आधा पेज में आ गया था, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के समय राकेश सिंह ने अपनी सम्पत्ति का जो ब्यौरा भिण्ड जिला निर्वाचन अधिकारी के सामने रखा है, वह छह पेज में आया है। इस दौरान राकेश सिंह की सम्पत्ति कई गुना बढ़ी है। जबकि नरोत्तम मिश्रा की सम्पत्ति मंत्री बनने के बाद भी कुछ ज्यादा नहीं बढ़ी है। पेश है दोनों नेताओं की सम्पत्ति का ब्यौरा।



राकेश चौधरी तब

मंत्री के रुप में विधानसभा में रखा सम्पत्ति का ब्यौरा
31 अक्टूबर 2002


1 - प्लाट वार्ड नं. 19 पुराना भिण्ड 60,000
2 - कृषि भूमि रतनुपुरा भिण्ड 57,000
3 - वाहन 1,56,000
     ब्याज मुक्त ऋण 4,87,619
4 - परिवार की ज्वाइंट सम्पत्ति में एक बंटा तीन भाग

राकेश चौधरी के पत्नि मंजू चतुर्वेदी के नाम सम्पत्ति
31 नवम्बर 2002

निवेश श्रृद्धा टॉकिज में 6,23,224
ग्वालियर शिन्दे की छावनी में मकान
दतिया में 14790 वर्गफीट के प्लाट में हिस्सा
पैत्रिक सोना एवं आवास व कृषि भूमि भिण्ड व इटावा में

राकेश चौधरी अब

विधानसभा चुनाव के समय निर्वाचन अधिकारी को दिया सम्पत्ति ब्यौरा
3 नवम्बर 2008

1 - नगद - 9,22,997
2 - बैंक व वित्तीय संस्थाओं में जमा - 4,69,286
3 - एलआईसी पॉलिसी 1 - 15,00,000
2 - 10,00,000
4 - वाहन स्कार्पिया 8,00,000
5 - सोना 470 ग्राम 8,84,000
      चांदी 20 किलो
6 - कृषि भूमि 2. 903 हेक्टेयर 18,57,200 स्वयं के नाम
7 - कृषि भूमि 81,32,700 एक बंटा दो भाग
8 - आवासीय एवं व्यवसायिक सम्पत्ति 2 करोड़ 22 लाख 10 हजार एक बंटा दो भाग

राकेश चौधरी पर ऋण

एलआईसी - 5,50,000
फायनेंस कंपनी - 3,75,000

अन्य देनदारी

एमपीईबी - 2,44,900
पीएचई - 2280

राकेश चौधरी की पत्नि श्रीमती मंजू चतुर्वेदी के नाम सम्पत्ति
3 नवम्बर 2008

1 - नगद - 1,27,784
2 - बैंक व वित्तीय संस्थाओं में जमा - 1,25,269
3 - एलआईसी पॉलिसी 1,00,000
4 - सोना 620 ग्राम 14,22,000
    चांदी 43 किलो
5 - कृषि भूमि 3,96,900 एक बंटा दो भाग
6 - आवासीय एवं व्यवसायिक सम्पत्ति 4,20,000

राकेश चौधरी के दो पुत्रों के नाम सम्पत्ति

पचास पचास हजार रुपए की दोनों पुत्रों के नाम एलआईसी
पुत्र दुष्यंत के नाम 2,08,000 की कृषि भूमि
पुत्र भरत के नाम 7, 63,000 की कृषि भूमि


नरोत्तम मिश्रा तब

विधानसभा चुनाव के समय जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपा सम्पत्ति का ब्यौरा
12 नवम्बर 2003

1 - नगद - 40570
2 - बैंक व वित्तीय संस्थाओं में जमा - 49,320
                                                              25,608

                                                             1,51,000
3 - बचत खाते में                                10,35,000
4 - वाहन टाटा सूमो
5 - सोना 5 तौला                                25,000
6 - कृषि भूमि डबरा                          6,65,000
7 - भवन व्यवसायिक एवं               85 लाख एक बंटा तीन भाग
     आवासीय

नरोत्तम की पत्नि श्रीमती गायत्री मिश्रा के नाम सम्पत्ति

1 - नगद 20,000
2 - बैंक व वित्तीय संस्थाओं में जमा - 5,56,511
                                                             1,35,000
3 - सोना 30 तौला 1,50,000 स्त्री धन

नरोत्तम के तीनों बच्चों के नाम सम्पत्ति

सावधि जमा 2,75,000


नरोत्तम मिश्रा अब

विधानसभा चुनाव के समय जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपा सम्पत्ति का ब्यौरा
4 नवम्बर 2008

1 - नगद - 1,18,280
2 - बैंक व वित्तीय संस्थाओं में जमा - 4,33,675
                                                                   5000
3 - बचत खाते में                                     3,06,557
4 - सोना 7 तौला                                     1,00,000
5 - रिवाल्वर                                          7000 लगभग
6 - कृषि भूमि डबरा                                15,00,000
7 - भवन व्यवसायिक एवं                       25,00,000
            आवासीय पैत्रिक
8 - भोपाल के रिवेरा टाउन में आवास 16,52,000

नरोत्तम पर ऋण 9,20,000


नरोत्तम की पत्नि श्रीमती गायत्री मिश्रा के नाम सम्पत्ति
4 नवम्बर 2008

1 - नगद                                               68,000
2 - एलआईसी बीमा -                          5,35,000
                                                            1,35,000
3 - सोना 38 तौला                                 5,00,000 स्त्री धन

नरोत्तम के दो नावालिग बच्चों के नाम सम्पत्ति

                       बीमा 5,00,000
काट डाले जानवर

मप्र में मांस उत्पादन दुगना,अंडों का आधा

प्याज, मटर, टमाटर, गोभी के उत्पादन में कमी

रवीन्द्र जैन

भोपाल। मध्यप्रदेश में मांस के लिए जानवरों के वध में तेजी आई है। बीते एक वर्ष में प्रदेश में मांस का उत्पादन लगभग दुगना हो गया है। राज्य सरकार बुधवार को विधानसभा के पटल पर रखे आर्थिक सर्वेक्षण में यह जानकारी अपनी उपलब्धि के रुप में बताई है। जबकि प्रदेश में अंडों का उत्पादन घटकर आधा रह गया है। सरकार का तर्क है कि वर्ड फ्लू के कारण अंडों के उत्पादन में कमी आई है। यहां बता दें कि पिछले वर्ष प्रदेश में प्याज, टमाटर, मटर व गोभी का उत्पादन भी घट गया है।

मप्र के आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2009-2010 के पृष्ठ क्रमांक 48 पर आइए। सरकार ने मांस उत्पादन के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए लिखा है कि - पिछले पांच वर्षों की तुलना में बीते वर्ष 2008-2009 में प्रदेश में मांस के उत्पादन में भारी वद्धि हुई है। वर्ष 2004-2005 में 16 हजार मैट्रिक टन मांस का उत्पादन हुआ था। जो कि वर्ष 2007-2008 में बढ़ते हुए 20.6 हजार मैट्रिक टन हो गया था, लेकिन वर्ष 2008-2009 में मप्र में मांस का रिकार्ड उत्पादन 32.20 हजार मैट्रिक टन हो गया है। यानि आप कह सकते हैं कि प्रदेश में मांस का उत्पादन लगभग दुगना हो गया है और मांस के लिए जानवरों के वध में तेजी आई है।

अंडों का उत्पादन घटा : प्रदेश में पिछले पांच वर्षों की तुलना में बीते वर्ष अंडों के उत्पादन में बेहद कमी आई है। वर्ष 2004-05 में अंडों का उत्पादन 9023 लाख था जो कि वर्ष 2006-07 में बढ़ते हुए 9747 लाख तक पहुंच गया। लेकिन बीते वर्ष 2008-09 में प्रदेश में घटकर कुल 6715 लाख अंडों की रह गई। सरकार ने अंडों के उत्पादन में कमी का कारण वर्ड फ्लू को बताया है।

सब्जियों का उत्पादन घटा : राज्य सरकार ने अपने सर्वें में बेशक वर्ष 2008-09 में सब्जियों के उत्पादन के आंकडे अनुमानित दिए हैं। जबकि वर्ष 2006-07 की तुलना में वर्ष 2007-08 में सब्जी का उत्पादन बेहद कम हो गया है। प्याज 6 लाख 29 हजार 654 मैट्रिक टन से घटकर 6 लाख 1 हजार 543 मैट्रिक टन रह गया है। मटर 2 लाख 29 हजार 559 मैंट्रिक टन के स्थान पर 2 लाख 9 हजार 418 मैट्रिक टन, टमाटर 3 लाख 30 हजार 585 मैट्रिक टन के स्थान पर 3 लाख 15 हजार 540 मैट्रिक टन तथा फूल गोभी 1 लाख 67 हजार 440 मैट्रिक टन से घटकर 1 लाख 21 हजार मैट्रिक टन रह गया है।



मांस उत्पादन

वर्ष 2007-08 20.60 हजार मैट्रिक टन

वर्ष 2008-09 32.20 हजार मैट्रिक टन


अंडों का उत्पादन

वर्ष 2007-08 9747 लाख

वर्ष 2008-09 6715 लाख


सब्जी का उत्पादन

प्याज - वर्ष 2006-07 629654 मीटरिक टन

वर्ष 2007-08 601543 मीटरिक टन


मटर - वर्ष 2006-07 229559 मीटरिक टन

वर्ष 2007-08 209418 मीटरिक टन


टमाटर - वर्ष 2006-07 330585 मीटरिक टन

वर्ष 2007-08 315540 मीटरिक टन


फूल गोभी - वर्ष 2006-07 629654 मीटरिक टन

वर्ष 2007-08 601543 मीटरिक टन

Tuesday, February 23, 2010









मुख्यमंत्री जी, यह अवसाद नहीं

शर्मिदगी है








रवीन्द्र जैन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को मप्र के नौकरशाहों को बुलाकर डिप्रेशन से बाहर निकलने का आव्हान किया है। यानि मुख्यमंत्री की नजर में प्रदेश के नौकरशाह जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अरविन्द जोशी के घर मिले करोड़ों रुपए के बाद डिप्रेशन में हैं। मुख्यमंत्री जी, यह हकीकत नहीं है। डिप्रेशन में तो प्रदेश की जनता है जिसकी जेबें लूटकर यह अफसर अपना घर भरने में लगे थे। सच्चाई यह है कि प्रदेश की नौकरशाही डिप्रेशन में नहीं, शर्मिंदगी का शिकार है। डिप्रेशन देर तक रहता है, लेकिन शर्मिदगी जल्दी ही दूर हो जाती है।

क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय बताने का कष्ट करेंगे कि - पिछले छह सालों में एक दर्जन से अघिक आईएएस अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के तहत प्रकरण कायम किए तब राज्य की नौकरशाही डिप्रेशन में नहीं आई? क्यों नहीं आईएएस एसोसिएशन ने कोई मिटिंग करके अपने सदस्यों को भ्रष्टाचार से बचने की सलाह दी? आज स्थिति यह है कि नौकरशाही प्रदेश को अपना चारागाह समझ रही है। राजनेताओं व मंत्रियों के साथ लूट का खुला खेल चल रहा है और जब अधिकारी रंगे हाथ पकड़े जाते हैं जब मुख्यमंत्री कहते हैं कि अधिकारियों को डिप्रेशन से बाहर आना चाहिए।

मुख्यमंत्री को कैसे पता कि प्रदेश के नौकरशाह डिप्रेशन में हैं। कितने अधिकारी मानसिक चिकित्सक के यहां स्वयं को दिखाने पहुंच चुके हैं? मुख्यमंत्री जी, मैं आपकी जानकारी के लिए यहां कुछ आंकड़े दे रहा हूं ताकि इस बेशर्म नौकरशाही का असली चेहरा आप भी देख सकें। मप्र में 6 दिसम्बर 2003 को उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी। प्रदेश की जनता को उम्मीद थी कि - दिग्विजय सिंह के दस वर्ष के कार्यकाल के बाद भाजपा की सरकार उसे राहत देगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सच्चाई आप भी जानते हैं कि किस तरह पहले दो वर्ष मुख्यमंत्री बदलने में बीत गए। जनवरी 2004 के बाद मप्र लोकायुक्त ने नौ मंत्रियों व पूर्व मंत्रियों, 3 आईएएस अधिकारियों, 1 आईपीएस अधिकारी तथा एक पार्षद के खिलाफ के खिलाफ भ्रष्टाचार के तहत प्रकरण कायम किए। इस दौरान 6 मंत्रियों व पूर्व मंत्रियों, 1 सांसद, 17 आईएएस अधिकारियों, 6 आईपीएस अधिकारियों, 3 आईएफएस, व एक पार्षद के खिलाफ चालान पेश किया गया है।

राज्य की नौकरशाही को भी समझना होगा कि उसे राजनेताओं का हुक्म का गुलाम बनकर धन कमाना है या इसी तरह शर्मिदगी से जीवन जीना है?

Monday, February 22, 2010

आनंद पांडे बने भास्कर के स्थानीय संपादक

भोपाल दैनिक भास्कर में अपनी कलम का लोहा मनवाने वाले आनंद पांडे ने भोपाल दैनिक भास्कर में स्थानीय संपादक के रुप में ज्वाइन कर लिया है। आखिर भोपाल की माटी अपने इस लाड़ले को दिल्ली से जबलपुर होते खींच ही लाई। भोपाल में स्वागत है आनंद भाई ...।

मुझे आनंद के साथ एक ही संस्थान में कभी काम करने का अवसर नहीं मिला, लेकिन मुझे याद है कि 1996 के आसपास जब आनंद भाई दैनिक भास्कर भोपाल में जमकर खबरें लिख रहे थे, तब एक दिन अचानक मेरे पास आए और उन्होंने बिना लाग लपेट के कहा कि - रवीन्द्र जी भोपाल में स्पेशल स्टोरी करने के लिए आपका नाम सुना है। मुझे आपसे बहुत कुछ सीखना है। उनकी इस विनम्रता व व्यवहार से मैं बेहद प्रभावित हुआ था। उनकी लगन व मेहनत ने ही उन्हें जल्दी ही दिल्ली तक पंहुचा दिया। दिल्ली में वे दैनिक भास्कर में गए थे, लेकिन उन्होंने जीटीवी व आईबीएन 7 में भी काम किया। संयोग से तीन वर्ष पहले दिल्ली में राज एक्सप्रेस का ब्यूरो कार्यालय खुला तो मुझे वहां पदस्थ किया गया। दिल्ली में आनंद भाई ने जो अपनापन दिया, उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है। दिल्ली में सप्ताह में एक-दो दिन हम दोपहर का भोजन मध्यप्रदेश भवन में साथ करते थे।

श्री आलोक मेहता जी के नईदुनिया ज्वाइन करने के बाद आनंद पांडे दिल्ली छोड़कर जबलपुर नईदुनिया के स्थानीय संपादक बनकर आ गए। मुझे उनके इस निर्णय पर आश्चर्य हुआ था। पिछले नवम्बर माह में मैं भी जबलपुर राज एक्सप्रेस में कुछ दिनों के लिए स्थानीय संपादक के प्रभार में पहुंचा था, तब आनंद भाई से विस्तार से चर्चा हुई। वे नईदुनिया में आकर खुश नहीं थे। लेकिन उन्होंने वहां भी पूरी लगन व मेहनत से काम किया था। जबलपुर में उस दिन सांसद राकेश सिंह ने अपने सरकारी घर में प्रवेश की पार्टी रखी थी। शहर के सभी पत्रकारों को बुलाया गया था। आनंद पांडे ने जैसे ही मुझे वहां देखा, उन्होंने चुपचाप पार्टी से निकलकर किसी अच्छे होटल में खाना खाने की योजना बना ली। मैं और आनंद शहर के एक शानदार होटल में पहुंचे और सुख दुख की बातें करते हुए हमने खाना खाया। आनंद भाई चाहते थे कि मैं कुछ दिनों जबलपुर में रहूं ताकि हम दोनों कुछ दिन साथ बीता सकें, लेकिन मुझे भोपाल वापस बुला लिया गया।

मुझे खुशी है कि आनंद पांडे स्वयं भोपाल आ गए हैं। अब भोपाल में ही बस जाना मेरे मित्र

रवीन्द्र जैन


राज एक्सप्रेस, भोपाल

Saturday, February 20, 2010

मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी को

14 लाख एडवांस दिया





रवीन्द्र जैन

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पत्नी श्रीमती साधना सिंह को 14 लाख रूपए एडवांस दिया है। यह बात दूसरी है कि श्रीमती सिंह ने अपने सम्पत्ति के ब्यौरे में इस एडवांस का उल्लेख नहीं किया है। 22 फरवरी 2010 से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा रहेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस सत्र में प्रदेश के सभी मंत्रियों की सम्पत्ति का ब्यौर सदन के पटल पर रखने की घोषणा की है।
वैसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो वर्ष पहले 29 फरवरी 2008 को डम्पर कांड के बाद राज्य विधानसभा में अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा दिया था। पेश है मुख्यमंत्री चौहान द्वारा विधानसभा के पटल पर रखा सम्पत्ति का ब्यौरा एवं 8 माह बाद विधानसभा चुनाव के समय 4 नवम्बर 2008 को चुनाव आयोग को दिया सम्पत्ति के ब्यौरा।

 मुख्यमंत्री द्वारा 29 फरवरी 2008 को विधानसभा के पटल पर रखा सम्पत्ति का ब्यौरा
स्वयं एवं दोनों अवयस्क पुत्रों की सम्पत्ति

1 - स्वयं की एलआईसी की वार्षिक प्रीमियम रू. 6,617
2 - दोनों पुत्रों की एलआईसी की वार्षिक प्रीमियम रू. 10,610 लगभग
3 - नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट रू. 60,000
4 - सोना व जेवर 64 ग्राम
5 - रिवाल्वर एक रू. 5,500
6 - घरेलू सामान रू. 1,80,000
7 - श्रीमती साधना सिंह को एडवांस रू. 14,00,000
8 - नगद एवं बैंकों में जमा राशि स्वयं व दोनों पुत्रों सहित रू. 7,85,000
9 - कृषि भूमि ग्राम जैत 4.79 एकड़ रू. 2,60,000
10 - कृषि भूमि ग्राम वैश्य, विदिशा 1.29 हेक्टर रू. 3,00,000
11 - आवासीय मकान 180/1 एसपी नगर विदिशा रू. 3,16,000
12 - विधायक परिसर में एक मकान बैंक ऋण पर जमा किश्त रू. 4,62,000

मुख्यमंत्री की पत्नि श्रीमती साधना सिंह की सम्पत्ति का ब्यौरा 29 फरवरी 2008 के अनुसार

1 - मोटर कार एम्बेसडर मॉडल 2000 बुक वेल्य़ु रू. 1,53,000
2 - स्वयं की एलआईसी वार्षिक प्रीमियम रू. 6,287
3 - नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट रू. 20,000
4 - सोना जेवरात 470 ग्राम
5 - नगद तथा बैंक में जमा राशि रू. 4,15,000
6 - ग्राम शेरपुरा विदिशा में प्लाट 0,052 हेक्टेयर रू. 1,04,000 लगभग
7 - कृषि भूमि ग्राम वैश्य विदिशा 4.725 हैक्टेयर रू. 11,00,000 लगभग
8 - फ्लैट ई 3/163 अरेरा कॉलोनी भोपाल रू. 3,00,000 लगभग
9 - विदिशा स्थित वेयर हाउस बैंक से ऋण लेकर रू. 36,00,000 लगभग
10 - सर्वधर्म कॉलोनी में प्लाट हेतु अग्रिम जमा रू. 41,000

नोट : मुख्यमंत्री की पत्नि ने अपनी सम्पत्ति में अपने पति से लिए ऋण रू. 14 लाख की राशि का जिक्र तक नहीं किया है।



मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 4 नवम्बर को सीहोर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शपथ पत्र के साथ दिया गया स्वयं एवं उनकी पत्नि की सम्पत्ति का ब्यौरा :

1 - नगद रू. 30,000
2 - बैंक में जमा दोनों पुत्रों सहित रू. 10,50,000
3 - एलआईसी वार्षि क प्रीमियम रू. 6,617
4 - एनएससी बचत खाते में रू. 60,000
5 - सोना 64 ग्राम कीमत रू. 78,000
6 - अन्य सम्पत्तियां
ए - रिवाल्वर रू. 5,500
बी - घरेलू सामान रू. 1,80,000
सी - श्रीमती साधना सिंह को ऋण रू. 14,00,000
7 - कृषि भूमि ग्राम जैत 4.79 एकड़ रू. 2,60,000
8 - कृषि भूमि ग्राम वैश्य, विदिशा 1.29 हेक्टर रू. 3,04,000
9 - आवासीय मकान 180/1 एसपी नगर विदिशा रू. 3,16,000
10 - विधायक परिसर में एक मकान बैंक ऋण पर जमा किश्त रू. 23,62,000

मुख्यमंत्री पर ऋण

1 - पंजाब नेशनल बैंक गोविन्दपुरा से रिवेटा टाउन के लिए आवासीय ऋण रू. 17,00,000
2 - वित्तीस संस्थाओं से विदिशा में कमान के लिए ऋण 95,000

श्रीमती साधना सिंह की सम्पत्ति 4 नवम्बर 2008 के अनुसार

1 - नगद रू. 35,000
2 - मोटर कार एम्बेसडर मॉडल 2000 बुक वेल्य़ु रू. 1,53,000
3 - स्वयं की एलआईसी वार्षिक प्रीमियम रू. 6,287
4 - नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट रू. 20,000
5 - सोना जेवरात 470 ग्राम कीमत रू. 6,90,000
6 - वित्तीय संस्थाओं तथा बैंक में जमा राशि रू. 1,80,000
7 - ग्राम शेरपुरा विदिशा में प्लाट 0,052 हेक्टेयर रू. 1,04,000 लगभग
8 - कृषि भूमि ग्राम वैश्य विदिशा 4.725 हैक्टेयर रू. 11,18,000 लगभग
9 - फ्लैट ई 3/163 अरेरा कॉलोनी भोपाल रू. 3,00,000 लगभग
10 - विदिशा स्थित वेयर हाउस बैंक से ऋण लेकर रू. 36,15,000 लगभग
11 - सर्वधर्म कॉलोनी में प्लाट हेतु अग्रिम जमा रू. 41,100

Friday, February 19, 2010

नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी की सम्पत्ति











एक करोड़ तीस लाख बैंक में

एक किलो से ज्यादा सोना

एक लाख नगद


रवीन्द्र जैन

भोपाल। मध्यप्रदेश की नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी के पास एक लाख रूपए नगद, एक करोड़ रूपए बैंक में और एक किलो से अधिक सोना है। यह हम नहीं कह रहे स्वयं नेता प्रतिपक्ष ने पिछले विधानसभा चुनाव लड़ते समय धार के जिला निर्वाचन अधिकारी को दिए अपने शपथ पत्र में कहा है। जमुनादेवी के पास रहने के लिए इंदौर में एक मात्र मकान है जिसकी वर्तमान कीमत लगभग तीन लाख रूपए है। उनके पास खेत आदि भी हैं। लगभग बीस लाख रूपए उनके डाक्टर बेटी के ज्वाइंट एकाउन्ट में जमा हैं।

जमुनादेवी ने प्रदेश की उप मुख्यमंत्री के रूप में 24 मार्च को विधानसभा के पटल पर जो जानकारी दी थी उसमें उन्होंने बचत खातों में कुछ भी जमा होने के बारे में कुछ नहीं बताया था, लेकिन 5 नवम्बर 2008 को जिला निर्वाचन अधिकारी को दिए अपने शपथ पत्र में उन्होंने भोपाल की दो बैंकों के बचत खातों में 57 लाख 26 हजार 634 रूपए एवं इंदौर की बैंक में के बचत खाते में 53 लाख 40 हजार 741 रूपए जमा बताए हैं। इसके अलावा उन्होंने इंदौर की विभिन्न बैंकों में अपनी पुत्री डॉ. हेमलता ढांड के संयुक्त खाते में लगभग 20 लाख रूपए जमा बताए हैं।

जमुनादेवी ने बताया है कि उनके पास जो सौ तौला सोना है, उसमें से पचास तौला उन्होंने स्वयं खरीदा है तथा पचास तौला उनकी स्वर्गीय मां ने उन्हें दिया था। बुआ जी के नाम से विख्यात जमुनादेवी के पास झाबुआ में दस बीघा जमीन है जो उन्होंने 1969 में मात्र 419 रूपए में खरीदी थी। उनके पास दो अन्य खेत भी थे। इनमें से एक राज्य सरकार ने पॉलिटेक्रिक कॉलेज बनाने के लिए अधिग्रहित कर लिया जिसका उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। बुआ जी ने अपना एक खेत मानव सेवा चिकित्सालय को दान कर दिया है।

बुआजी आजकल 22 फरवरी 2010 से शुरू होने वाले मप्र विधानसभा के सत्र में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने की जोरदार तैयारी में लगी हुई हैं।

Wednesday, February 17, 2010

विधानसभा पर हो सकता है आतंकी हमला




केन्द्र की चेतावनी के बाद भी नहीं चेती राज्य सरकार



रवीन्द्र जैन

भोपाल। मध्यप्रेदश का विधानसभा भवन आतंकियों के निशाने पर है, लेकिन राज्य सरकार नींद में सो रही है। भोपाल आईजी शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने राज्य सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि होशंगाबाद में टेलीस्कोपिक रायफल मिलने, देश के कई हिस्सों में हुए बम धमाकों के तार मध्यप्रदेश से जुड़े होने एवं अभी भी सिमी को नेटवर्क प्रदेश में सक्रिय है इससे विधानसभा की सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने विधानसभा की सुरक्षा बढ़ाने एवं आसपास के क्षेत्र में तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगाने का सुझाव दिया है।
पूना में हुए बम धमाके बाद मप्र की विधानसभा की सुरक्षा को लेकर फिर से चिन्ता बढ़ गई है। बुधवार को विधानसभा के अधिकारी ने भोपाल आईजी की गोपनीय रिपोर्ट के आधार राज्य सरकार को विधानसभा की सुरक्षा बढ़ाने तत्काल बढ़ाने के बारे में चर्चा की है। भोपाल आईजी ने अपनी विस्तृत report  में इन घटनाओं का जिक्र किया है, जिनके तार मप्र से जुड़े हैं। यहां बता दें कि पिछले वर्ष केन्द्र सरकार के खुफिया विभाग ने भी राज्य सरकार को विधानसभा की सुरक्षा पुख्ता करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विधानसभा के प्रमुख सचिव एके पयासी ने भोपाल आईजी शैलेन्द्र श्रीवास्तव के बाद दिल्ली में लोकसभा सचिवालय की सुरक्षा की व्यवस्था का जायजा लिया था।

उच्च स्तरीय बैठक : केन्द्र सरकार की चेतावनी के बाद 18 नबम्बर 2009 को मप्र विधानसभा में सुरक्षा को लेकर उचच स्तरीय बैठक हुई जिसमें स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा राज्य के गृहमंत्री एवं पक्ष विपक्ष के कई विधायक मौजूद थे। बैठक में पुलिस विभाग ने विधानसभा की सुरक्षा के लिए लगभग 22 करोड़ रूपए का बजट बताया, लेकिन तय हुआ कि फिलहाल विधानसभा के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाने एवं सुरक्षा की कड़ी निगरानी के लिए पुलिस विभाग को 4 करोड़ रूपए अनावर्ती एवं 2.45 करोड़ रूपए का बजट आवर्ती योजना में दिया जाए।

बनना है सुरक्षा जोन : इस उच्च स्तरीय बैठक में तय हुआ कि रोशनपुरा नाके से विधायक विश्राम गृह, विधानसभा भवन, मंत्रालय एवं सतपुड़ा व विन्ध्याचल भवन तक एक सुरक्षा जोन बनाया जाए। इस पूरे क्षेत्र में होने वाली हर पल की घटना को सीसीटीवी कैमरे में कैद किया जाए। इसका कंट्रोल रूम विधानसभा में बनाया जाए तथा इस जोन की सुरक्षा निगरानी के एक डीएसपी, चार निरीक्षक, 10 उप निरीक्षक या सहायक उप निरीक्षक, 23 प्रधान आरक्षक तथा 69 आरक्षक तैनात किए जाएं। यह कर्मचारी तीन शिफ्टों में चौबीस घंटे सीसीटीवी के कैमरे केमाध्यम से सुरक्षा जोन में होने वाली हर घटना पर नजर रख सकेंगे।

बेफिक्र सरकार : उच्च स्तरीय बैठक के बाद विधानसभा सचिवालय ने उक्त प्रस्ताव बनाकर राज्य के वित्त विभाग को भेज दिया, लेकिन वित्त विभाग ने इस संवेदनशील मुद्दे पर तीन माह बाद भी पुलिस को एक धेला नहीं दिया है। वित्त विभाग को नींद से जगाने के लिए विधानसभा सचिवालय ने 9 दिसम्बर को राज्य सरकार को स्मरण पत्र लिखा, लेकिन फिर भी कार्यवाही नहीं हुई तो विधानसभा के अधिकारी ने पूना में हुए बम विस्फोट का हवाला देते हुए वित्त विभाग से विधानसभा की सुरक्षा के लिए पुलिस को राशि देने की गुहार लगाई है।

अभी ऐसी है सुरक्षा : मप्र विधानसभा की सुरक्षा फिलहान भगवान भरोसे है। अरेरा हिल्स पर स्थित विधानसभा भवन एवं विधायक विश्राम गृह कुल 105 एकड़ जमीन बने हैं। विधानसभा भवन में विधानसभा एवं विधान परिषदों के दो बड़े बड़े सभागृहों के अलावा इस भवन में 14 समिति कक्ष, मंत्रियों ंके लिए 57 कक्ष मिलका कुल 300 कमरे हैं, 350 दरवाजे तथा 1000 खिड़कियां हैं। जबकि विधायक विश्राम गृह के तीन खंडों में 288 कमरें एवं पारिवारिक खंडों में लगभग 150 कमरे हैं। इसकी सुरक्षा के लिए एसएएफ के मात्र 16 सुरक्षा कर्मचारी तैनात हैं, जो तीन शिफ्टों में ड्यूटी करते हैं। विधानसभा के सुरक्षा गार्डों को अभी तक सुरक्षा संबंधी न तो प्रशिक्षण दिया गया और न ही उनके पास सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के हथियार हैं।

Tuesday, February 16, 2010

बजाज ने सात पत्रकारों

को 'पीपुल्स' से जोड़ा


भोपाल समेत मध्य प्रदेश के चार शहरों से प्रकाशित हिंदी दैनिक 'पीपुल्स समाचार' के मीडिया सलाहकार बने अवधेश बजाज ने कई पत्रकारों को पीपुल्स ज्वाइन कराया है. मंगलवार को दैनिक भास्कर, दैनिक नवदुनिया व दैनिक जागरण से 7 पत्रकार 'पीपुल्स' पहुंच गए हैं. बजाज के साथ सोमवार को तीन पत्रकार पहले ही ज्वाइन कर चुके हैं.
मंगलवार को नवदुनिया के वरिष्ठ पत्रकार महेश दीक्षित ने पीपुल्स समचार में अपनी आमद दे दी. दीक्षित राज एक्सप्रेस में अवधेश बजाज के समाचार संपादक रह चुके हैं. उनके साथ नवदुनिया से ही डा. राजीव अग्निहोत्री एवं जितेन्द चौरसिया ने पीपुल्स समाचार ज्वाइन कर लिया है. डा. अग्निहोत्री ने फीचर संपादक के रूप में तथा चौरसिया को शिक्षा क्षेत्र की रिपोर्टिंग के लिए लाया गया है. इनके अलावा भोपाल दैनिक भास्कर से सुश्री राखी झंवर एवं गौतम तिवारी ने भी पीपुल्स समाचार ज्वाइन कर लिया है. अवधेश बजाज भोपाल में दैनिक जागरण में लंबे समय तक संपादक रह चुके हैं, इसलिए उन्होंने सबसे ज्यादा साथी वहीं से तोड़े हैं. जागरण के तीन पत्रकारों प्रभु पटेरिया, बृजेश चौकसे एवं उमेश निगम ने सोमवार को ही पीपुल्स समचार ज्वादन कर लिया था. मंगलवार को जागरण से साईन अंसारी एवं प्रवीण शर्मा ने भी पीपुल्स ज्वाइन कर लिया है. आने वाले कुछ दिनों में भोपाल के समाचार पत्रों में व्यापक परिवर्तन के आसार हैं.

Monday, February 15, 2010

अवधेश बजाज पीपुल्स पहुंचे



























जागरण से तीन  पत्रकारों  को भी साथ लाए


भोपाल। मध्यप्रदेश में आग उगलने वाली कलम के सिपाही अवधेश बजाज को पीपुल्स ग्रुप ने अपना मीडिया सलाहकार नियुक्त किया है। पीपुल्स ग्रुप ने मप्र में पीपुल्स समाचार के नाम से अखबार निकाला है। यह अखबार भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर से भी प्रकाशित हो रहा है।
अवधेश बजाज को प्रदेश में सबसे छोटी उम्र में संपादक बनने का सौभाग्य मिल चुका है। वे मात्र 27 वर्ष की उम्र में नवभारत भोपाल के संपादक बनाए गए थे। वे लंबे समय तक दैनिक जागरण भोपाल के भी संपादक रहे। भोपाल से प्रकाशित दैनिक राज एक्सप्रेस में वे पहले गु्रप एडीटर बनाए गए थे। बजाज को आधुनिक पत्रकार की गहरी समझ है। पाठकों की पसंद का अखबार निकालना उन्हें आता है। पत्रकारिता में उनके तीखे तेवर ही उनकी पूंजी भी हैं। राज एक्सप्रेस छोडऩे के बाद अवधेश बजाज ने बिच्छु डॉट कॉम के नाम से पहले बेवसाइट लांच की तथा बाद में इसी नाम से पाक्षिक समाचार पत्र भी शुरू किया। राजनेताओं व नौकरशाही को सीधे निशाने पर लेकर उन्होंने बेवसाइट और पाक्षिक दोनों को कुछ ही दिनों में पूरे मप्र में चर्चित कर दिया है। प्रदेश के मंत्री हों या मंत्रालय में बैठे अधिकारी, जिलों के कलेक्टर हो, या किसी भी राजनीतिक दल के नेता, सभी बिच्छु डॉट कॉम का इंतजार करते नजर आते हैं।
बजाज ने सोमवार को पीपुल्स ग्रुप में अपनी आमद देदी है। उनके आते ही दैनिक जागरण भोपाल के तीन सक्रिय और सजग पत्रकारों प्रभु पटेरिया, बृजेश चौकसे एव उमेश निगम ने भी जागरण छोड़कर पीपुल्स समाचार के भोपाल एडीशन में ज्वाइन कर लिया है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में इस समाचार पत्र में व्यापक फेरबदल हो सकता है। इंदौर व भोपाल के स्थाानीय संपादकों के प्रभार में भी बदलाव की खबरें हैं।

Friday, February 12, 2010

भ्रष्ट विधानसभा अफसरों पर क्यों नहीं होती कार्यवाही




रवीन्द्र जैन

भोपाल। आंध्रप्रदेश विधानसभा के विशेष सचिव विधानसभा के गोपालकृष्णा के यहां पड़े एंटी करेप्शन ब्यरो के छापों में बीस करोड़ रूपए की सम्पत्ति पकड़े जाने के बाद मप्र विधानसभा के तीन अधिकारियो का मामला फिर से गर्म हो गया है। पिछले साल मप्र विधानसभा के तीन अधिकारियों के यहां इंकम टैक्स विभाग ने छापा मारा था, जिसमें लगभग सौ करोड़ रूपए की अवैध सम्पत्ति मिली थी। इस संबंध में इंकम टैक्स विभाग ने स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी को लिखित में रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन स्पीकर ने आज तक इन अफसरों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।

इंकम टैक्स विभाग ने विधानसभा के अतिरिक्त सचिव सत्यनारायण शर्मा,अवर सचिव कमलाकांत शर्मा एवं निज सचिव केपी द्विवेदी के यहां 23 जुलाई को छापा मारा था। इन अधिकारियों के यहां इंकम टैक्स को किलो में सोना व लाखों रूपए के अलावा करोड़ों रूपए की सम्पत्ति मिली थी। सतयनारायण शर्मा ने इंकम टैक्स विभाग के देखकर अपने घर में रखे दस्तावजों में आग भी लगा दी थी तथा इंकम टैक्स विभाग को किसी प्रकार का सहयोग देने से इंकार कर दिया, जिसकी रिपोर्ट इंकम टैक्स ने पुलिस विभाग में की थी। पुलिस सत्यनारायण शर्मा को गिरफ्तार भी किया था। इतना होने के बाद भी स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने इन अधिकारियों के खिलाफ यह कहते हुए कार्यवाही नहीं की कि - इंकम टैक्स विभाग की रिपोर्ट आने के बाद वे कार्यवाही करेंगे। तीन महिने पहले इंकम टैक्स विभाग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में इन तीनों अधिकारियों के घरों से करोड़ों रूपए की अनुपातहीन सम्पत्ति मिलने की जानकारी विधानसभा सचिवालय को दे दी है।

इंकम टैक्स की रिपेार्ट आने के बाद स्पीकर रोहाणी ने विधानसभा के प्रमुख सचिव एके पयासी को इन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे, लेकिन पयासी ने यह कहकर कार्यवाही करने से इंकार कर दिया कि विभाग की अंतरिम रिपोर्ट पर कार्यवाही नहीं की जा सकती। वे अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कार्यवाही करेंगे। सूत्रों के अुनसार पिछले दिनों स्पीकर ने महसूस किया कि प्रमुख सचिव जानबूझकर भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं तो उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यवाही संबंधी फाइल विधानसभा के एक अन्य सचिव को भेजी जाए एवं सचिव के द्वारा इस संबंध में कानूनी जानकारी लेकर र्कावाही की जाए,लेकिन प्रमुख सचिव एके पयासी ने गुरूवार तक उक्त फाइल सचिव के पास नहीं भेजी है।

लोकायुक्त ने क्यों नहीं की कार्यवाही : मप्र के आईएएस अरविन्द जोशी व टीनू जोशी के मामले में अखबारों की कटिंग के आधार पर प्रकरण कायम करने वाले लोकायुक्त संगठन पर उंगली उठ रही है। सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि लोकायुक्त ने विधानसभा के तीन अफसरों पर लगभग सौ करोड़ रूपए मिलने के मामले में प्रकरण कायम क्यों नहीं किया?

इनका कहना है :



इस संबंध में कार्यवाही का निर्णय स्पीकर को करना है। पिछले दिनों स्पीकर ने उक्त फाइल मुझ से मंगा ली है। फाइल स्पीकर के पास है, वे जो निर्देश देंगे, हम वह कार्यवाही करेंगे।

एके पयासी
प्रमुख सचिव, मप्र विधानसभा





अवर सचिव कमलाकांत शर्मा की सम्पत्ति

- विधानसभा के अवर सचिव कमलाकांत शर्मा ने सरकारी नौकरी में रहते भ्रष्टाचार की कमाई से लगभग दस करोड़ रूपए कमाए हैं।
- कमलाकांत ने भोपाल के स्वामी विवेकानंद कॉलेज में अवैध कमाई से तीन करोड़ रूपए निवेश किए हैं। कॉलेज के दस्तावेजों से इसकी पुष्टि की जा सकती है।
- कमलाकांत के पास भोपाल के ग्राम बरखेडी कलां में नब्बे लाख रुपए कीमत के खेत हैं।
- कमलाकांत ने अपनी दूसरी पत्नि के वंदना शर्मा के नाम से नेहरूनगर भोपाल में सी 110 नंबर का मकान खरीदा कीमत 40 लाख रुपए।
- कोटरा सुल्तानाबाद भोपाल की चित्रगुप्त कॉलोनी में वंदना शर्मा के नाम से ही प्लाट नंबर 20, कीमत 30 लाख रुपए।
- अपनी अवैध कमाई को एक नंबर की कीरने के लिए रीवा में वंदना शर्मा के नाम से डेयरी संचालन केवल कागज पर दिखाते रहे हैं।
- ढेकहा मोहल्ला रीवा में अपने ससुर महिमा शंकर पांडेय एवं सास विद्यावती पांडेय के नाम से पचास लाख रूपए का कमान बनवाया।
- कमलाकांत ने अवैध कमाई से ही रीवा के अरूणनगर में मकान बनवाया जिसे अभी 16 लाख रूपए में बेचा है।
- रीवा शहर के बाहर बनकुईयां राजस्व मंडल में स्वयं, पन्ति, बच्चों एवं सास ससुर के नाम से 35 एकड़ भूमि क्रय की है जिसकी कीमत 80 लाख रूपए है।
- विवेकानंद इंजीनियरिंग कॉलेज से साठ लाख रूपए अवैध तरीके से निकाले गए।
- कॉलेज की एक कार फर्जी हस्ताक्षर करके अपने रिश्तेदार के नाम कर ली है।
- कमाकांत ने तनिष्क मैनेजमेन्ट कंपनी बनाकर उसमें विभिन्न नामों से चालीस रूपए का निवेश किया।
- कमलाकांत, उनकी पन्ति वंदना शर्मा एवं उनके रिश्तेदारों ने विवेकानंद कॉलेज में वेतन के नाम से 2.80 करोड़ रुपए निकाले, इसमें से 1.80 करोड़ रूपए का गबन किया गया।
- अपनी एक महिला मित्र, जो कि महिला एवं बाल विकास विभाग में परियोजना अधिकारी है, के नाम से कॉलेज में बीस लाख रूपए का निवेश किया गया है।
- कमलाकांत ने महिला बाल विकास विभाग में प्रतिनियुक्ति पर रहने के दौरान भारी भ्रष्टाचार किया है इसकी भी जांच होना चाहिए।


 निज सचिव केपी द्विवेदी की सम्पत्ति


- तत्कालीन विधानसभा स्पीकर श्री निवास तिवारी के निज सहायक रहे केपी द्विवेदी पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा से अनुमति लिए बिना करोड़ों रूपए विवेकानंद इंजीनियरिंग कॉलेज में निवेश किए हैं।
- केपी द्विवेदी ने भोपाल के बरखेडी कलां में विभाग को बिना बताए 32 लाख रूपए की एक एकड़ भमि खरीदी।
- के पी ने भोपाल के नयापुरा में पच्चीस हजार वर्गफीट का फार्म भी बिना विभाग को बताए खरीदा है।
- केपी ने भोपाल की आधुनिक गृह निर्माण समिति में दो प्लाटों के लिए राशि पांच लाख रूपए जमा की है।
- केपी की काली कमाई की जानकारी विधानसभा स्थित बैंक के खाता क्रमांक 01190041333 की डिटेल निकलवाने से मिल जाएगी।
- केपी ने 10 अप्रेल 09 को अपने उपरोक्त बैंक खाते से पच्चीस पच्चीस लाख के दस चेक जारी किए हैं। यह ढाई करोड़ रूपए की राशि उनके पास कहां से आई?
- केपी ने विधानसभा कर्मचारी सहकारी खास समिति के अध्यक्ष रहते अपने कॉलेज के लिए फर्जी तरीके से 1.21 करोड़ रूपए की एफडीआर बना ली, ताकि इंजीनियरिंग कॉलेज के संचालन की अनुमति मिल सके।
- विवेकानंद कॉलेज संचालित करने वाली संस्था अक्षय शक्ति शिक्षा समिति में केपी द्विवेदी स्वयं अध्यक्ष रहे एवं पत्नि चंद्रकांती द्विवेदी को कोषाध्यक्ष एवं रिश्तेदार विवेकानंद द्विवदी को सचिव बनाकर करोड़ों रूपए का गबन किया है।
- केपी ने सत्य सांई सहकारी बैंक में जमा 35 लाख व 17 लाख रूपए की एफडीआर कॉलेज प्रबंधन की बिलना अनुमति के तुडवा लीं।
- केपी ने अपनी पत्नि के चद्रकांती द्विवेदी के नाम से साढ़े दस लाख रूपए की कीमत से 52 सीटर बस क्रमांक एमपी 04 एचबी 9189 खरीदी। यह पैसा उनके पास कहां से आया?
- केपी द्विवेदी ने अपनील पत्नि के नाम से भोपाल के पारस सिटी में एक फ्लेट खरदा एवं उसे बेचका साढ़े नो लाख रूपए कॉलेज में श्यामकली के नाम से निवेश कर दिया। चंद्रकांती एवं श्यामकली एक ही महिला है।
- केपी ने कॉलेज में फार्मेसी के भवन को दिखाकर बीएड की अनुमति प्राप्त की है।

Tuesday, February 9, 2010

dr. govind singh

प्रदेश  के सबसे बड़े भ्रष्टाचार की जांच सी.बी.आई. को सौंपे

जोशी और संघ परिवार के संबंध उजागर करें



भोपाल, म0प्र0 के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डा0 गोविन्द सिंह ने प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्री एवं आय0ए0एस0 अधिकारी द्वारा किए गए व्यापक भ्रष्टाचार की जांच के मामले को सी.बी.आई. को सौंपने की मांग की है । डा0 सिंह ने आरोप लगाया कि अकेले जलसंसाधन विभाग में ही 1000 करोड़ रूपए का भ्रष्टाचार हुआ है । इसके अलावा खनिज साधन, स्वास्थ्य,महिला बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं परिवहन विभाग में प्रमुख रूप से पिछले तीन वर्षों में करीब 5000 करोड़ रूपये से अधिक का भ्रष्टाचार हुआ है ।

उन्होंने भ्रष्ट आय0ए0एस0 अधिकारी अरविंद जोषी उनके पिता एच0एम0 जोषी के संघ परिवार के बीच क्या संबंध है उसे भी उजागर करने की मांग की है। डा0 सिंह का कहना है कि भोपाल में आयोजित होने वाले हिन्दू समागम के आयोजन समिति के अध्यक्ष पूर्व आय.पी.एस. अधिकारी एच.एम.जोशी के घर से 5 करोड़ रूपए की संपत्ति मिलना कहीं न कहीं संघ परिवार और उनके बीच संबंधों की ओर संकेत करती है ।

डा0 गोविन्द सिंह ने कहा कि साधारण बीमा एजेण्ट सीमा जायसवाल द्वारा पिछले कुछ दिनों में ही 50 करोड़ रूपए का invesment  आई.सी.आई.सी.आई. बैंक में कराया है वह पूरा पैसा म0प्र0 के आय.ए.एस. अधिकारियों का ही है । मध्यप्रदेश के आय.ए.एस. अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री एवं मंत्रीगणों का भी है । डा0 सिंह ने जल संसाधन विभाग में व्याप्त 1000 करोड़ रूपए के भ्रष्टाचार की विस्तृत जानकारी जुलाई 2009 में अपने बजट भाषण के दौरान सरकार एवं मुख्यमंत्री को दी थी परन्तु इसके बाद भी मुख्यमंत्री द्वारा इस बात को गंभीरता से नही लिया गया क्योंकि भ्रष्टाचार की गंगा मुख्यमंत्री के यहां से ही निकलती है । डा0 सिंह द्वारा प्रदेष के वरिष्ठ आय0ए0एस0 अधिकारियों द्वारा जल संसाधन विभाग में किए गए हजारों रूप्ये भ्रष्टाचार व बीमा कंपनी में करोड़ों रूप्ए invesment  संबंधी घोटाले की सी0बी0आई0 से जांच कराने की मांग की है ।

Monday, February 8, 2010

dr.sunilam

जार्ज की छवि को नष्ट भ्रष्ट करने की साजिश





कोई तो जार्ज से पूछे कि तुम क्या चाहते हो?











डॉ. सुनीलम 

 (पूर्व विधायक, राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी)

इन दिनों श्री जार्ज फर्नांडिज चर्चा में हैं। गत पांच दशको  में भी वे चर्चा में रहे हैं लेकिन तब चर्चा होती थी जार्ज
फर्नांडीज के आन्दांलनों की, सरकारों के साथ वाद विवाद की, आज जो चर्चा हो रही है वह उनकी छवि के एकदम विपरीत है। जाॅर्ज फर्नांडीज का नाम आते ही लोगों के जेहन में उनका बम्बई की सड़कों पर रोज का आन्दोलन तथा उससे उत्पन्न होने वाले आरोप प्रत्यारोप आते हैं। वही जाॅर्ज फर्नांडीज जिन्होंने बम्बई के एकछत्र नेता एस के पाटिल को चुनाव हराया था। तब उन्होने र्जाइंट किलर कहा गया। जाॅर्ज ही थे जो कई दषकों तक सड़कों पर बाल ठाकरे की षिव सेना से मुकाबला करने की स्थिति में थे वह जाॅर्ज जिन्होंने बम्बई के होटल के बैरों से लेकर टैक्सी वालों तक सभी को इकट्ठा किया था। बम्बई के कामगारों का अपना सहकारी बैंेक भी स्थापित किया। जिसकी कुल पूंजी आज हजारों करोड़ में है। यह वही जाॅर्ज हैं जिन्होंने इंदिरा गांधी की तानाषाही को चुनौती दी। उन्हें डाइनामाईट कांड का आरोपी बनाया गया। यदि यूरोप की समाजवादी सरकारों ने सोषलिस्ट इंटरनेषनल के नेतृत्व में हस्तक्षेप नहीं किया होता तो राष्ट्रद्रोह के आरोप में उन्हें फांसी दी जा सकती थी। यह वहीं जाॅर्ज फर्नांडीज हैं जो जेल से 1977 में सबसे अधिक वोट लेकर मुजफ्फरपुर से चुनाव जीते थे। केवल जंजीरों से बंधे जाॅर्ज के पोस्टर उन्हें चुनाव जिताने के लिए काफी थे। इतनी लोकप्रियता उन्हें हासिल थी। जाॅर्ज डाॅ. राममनोहर लोहिया के अभिन्न साथियों में थे। जाॅर्ज को एक ऐसे नेता के तौर पर याद किया जाता है जो सीधे जनता सरकार में जेल से निकलकर मंत्री बने थे। जिन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए जिला उद्योग केन्द्रों का निर्माण किया। यह वही जाॅर्ज हैं जिन्होंने चुटकियों में आईबीएम तथा कोका कोला जैसी बडी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को देश से निकाल बाहर किया था। यही जाॅर्ज हैं जिन्होंने उद्योग को लाइसेंस राज से मुक्त किया था। कौन भूल सकता है जाॅर्ज के उस भाषण को जिसके माध्यम से उन्होंने मोरारजी की सरकार को डिफेंड किया था। यह वही जाॅर्ज हैं जिन्होंने समाजवादी नेता तथा अपने परममित्र समाजवादी चिंतक मधुलिमये की सलाह पर बिना झिझके सरकार से अलग होने का फैसला किया था। यानी जनता सरकार बनाने में तथा उससे अलग होने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले नेता का नाम था जाॅर्ज फर्नांडिज। जब जाॅर्ज चुनाव हार गये, संसदीय राजनीति में दरकिनार कर दिये गये तब भी उन्होंने बोफोर्स का मामला स्विीडन से निकाल कर तत्कालीन मिस्टर क्लीन का पर्दाफाश किया था। वे जाॅर्ज ही थे जिन्होंने कहा था कि देश को एक वीपी सिंह की जरूरत है उन्होंने वीपी सिंह के इर्द गिर्द देश भर में मुहिम चलाकर जनता दल को गठित करने में तथा नेशनल फ्रंट की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। वही जाॅर्ज जिनके चलते राजीव गांधी विपक्ष में बैठने को मजबूर हुए थे। मंत्री के तौर पर कांेकण रेलवे गठित कर जाॅर्ज ने नया इतिहास बनाया था तथा कोंकण क्षेत्र के लोगों की सौ वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया था। यह वहीं जाॅर्ज थे जो रेलवे मंत्री होने के बावजूद रेलवे के भ्रष्टाचार के खिलाफ सार्वजनिक मुहिम चलाया करते थे। देश में सबसे पहले जब नई आर्थिक नीति को थोपा गया तब जाॅर्ज ही थे जिन्होंने उसका मुकाबला करने के लिए गांध् ाीवादियों से लेकर नक्सलवादियों तक सभी को मैदान में उतारने का काम किया। उन्हें यह कहने में झिझक नहीं थी कि यदि छः महीने के भीतर हमने देश को नहीं बचाया तो हम दूसरी बार बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के उपनिवेश बन जायेंगे। यह वही जाॅर्ज थे जिन्होंने चैदह सांसदों को इकट्ठा कर समता पार्टी का गठन किया था। आजीवन गैर कांग्रेसवाद के विचार को लेकर चलने वाले जाॅर्ज एनडीए के गठन करने वाले प्रमुख नेता थे। मेरे शब्दों में उन्हेांने भाजपा को वैधानिकता देने का आपराधिकपूर्ण कार्य किया था। जिसका खुला विरोध देश के समाजवादी साथियों द्वारा किया गया था। खादी का कुर्ता-पैजामा पहनकर देश के रक्षाकर्मियों के बीच पहुंचने वाले वे पहले रक्षामंत्री के तौर पर जाने गये। संक्षेप में जाॅर्ज एक ऐसे नेता की छवि रखते थे जो समाज और देश के लिए समर्पित है। जिसका घर-परिवार सम्पति से कोई लेना देना नहीं है जो निर्भिकता के साथ पूरी व्यवस्था को चुनौती देता है। संसद से लेकर सड़कों तक जिसकी आवाज संघर्ष करते हुए गूंजा करती है।
अचानक जाॅर्ज की शारीरिक स्थिति खराब होने लगी। 1995 में जब वे अपने घर में कपड़े धो रहे थे तब गिर पड़े, बाद में उन्हें वायरल इन्फेकशन हो गया। कमजोरी के कारण गिरने पर तीन कृष्णामेनन मार्ग में उन्हें दिमाग में अन्दरूनी चोटें आयी। पता चलने पर एम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डाॅ. मेहता द्वारा उनका आॅपरेशन किया गया। दूसरा आपरेशन जसलोक अस्पताल बम्बई में हुआ। आॅपरेशनों के बाद 2005 में खुलासा हुआ कि दिमाग की नलियों में पानी भर गया है। एम्स अस्पताल में फिर डाॅ मेहता द्वारा आपरेशन किया गया। एम्स के प्रोफेसर डाॅ. कमलेश्वर प्रसाद तथा डाॅ. पद्मा लगातार उनका इलाज करते रहे। भारत-अमरीका न्यूकिलयर समझौता 2008 पर बहस के बाद उन्हें एक सप्ताह फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया बाद में उनका गाॅलस्टोन (गंगाराम अस्पताल) तथा दोनों आंखों का कैटरेक्ट (डाॅ. पकरासी क्लीनिक) का आॅपरेशन हुआ। दिमाग पर एल्जाइमर बीमारी का असर लगातार बढ़ता जा रहा था। याददाश्त और बोलने की शक्ति लगातार कम हो रही थी इसके बावजूद वे तिब्बत, बर्मा से जुड़े सवालों तथा मजदूरों के अधिकारों से जुड़े कार्यक्रमों में आते-जाते थे। तथा घर पर आने वाले मेहमानों से इत्मीनान से मिला करते थे। भारत-अमेरिका न्यूक्लियर समझौता को लेकर संसद में हुई बहस और वोटिंग के दौरान मैंने दो दिन जाॅर्ज साहब को जब लाचारी की स्थिति में देखा तब मैं समता पार्टी के गठन के बाद पहली बार उनसे मिला। स्वास्थ्य का हाल जानने के लिये गया उसके बाद मैं जब भी दिल्ली आता जाॅर्ज साहब के स्वास्थ्य का हाल चाल जानने जरूर तीन कृष्णामेनन जाता। मैंने जब सप्तक्रांति विचार यात्रा करने का मन बनाया तब मैंने उनसे मुलाकात की वे बहुत खुश हुए उन्होंने डाॅ. राममनोहर लोहिया के जन्म शताब्दी वर्ष पर होने वाली सप्तक्रांति विचार यात्रा के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी। श्रीमती जया जेटली
तथा श्री फ्रेडी के साथ कार्यक्रम में पहुंचे भी। इस बीच वे जब चुनाव हारे तब मैंने उनसे पूछा की आप अब कहां जायेंगे? उन्होंने बताया कि हौजखास के मकान में दी अदर साइड का कार्यालय है तथा ऊपर चढ़ना मेरे लिए सम्भव नहीं है इस कारण मैं जया की बेटी ने प्रस्ताव दिया है उसका मकान बन रहा है उसमें ग्राउण्ड फ्लोर पर रहूंगा। मैं वहां से सीधे श्रीजयपाल रेड्डी, शहरी विकास मंत्री के घर गया उनसे कहा कि जाॅर्ज साहब ने प्रधान मंत्री को पत्र लिखा है जार्ज साहब की हालत खराब है छः महीने का समय मकान खाली करने के लिए चाहते हैं उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें पत्र भेज दिया है। बाद में मैं मध्य प्रदेश चला गया लगातार वहीं रहा अखबारों में पढ़ने को मिला कि 2 जनवरी की रात अचानक लैलाजी एवं जार्ज साहब कि बेटे ने सभी दरवाजे बंद कर जार्ज साहब से कुछ खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराये देर रात्रि जब उनके भाई पहुंचे तो उन्हें घर में नहीं आने दिया गया। अगले दिन चाय पार्टी का भी आयोजन हुआ। श्री जार्ज फर्नांडीज को उनके भाई रिचर्ड फर्नांडीज तथा एम्स के डाॅक्टरों को बिना बताये साकेत स्थित मैक्स हाॅस्पिटल ले जाया गया जहां से उन्हें बाबा रामदेव के आश्रम में ले जाया गया। जबर्दस्त ठंड में एम्स से दूर ले जाये जाने से चिंतित होकर मैं श्री मुलायम सिंह जी के पास गया जिन्होंने विस्तृत तौर पर बाबा रामदेव से बातचीत कर जाॅर्ज साहब के स्वास्थ्य का हालचाल पूछा तथा मुझसे कहा कि यदि जरूरत होगी तो मैं हरिद्वार जाऊंगा। अखबारों में खबर पढ़ने को मिली कि लैलाजी द्वारा तमाम आरोप जया जी तथा जार्ज साहब के भाइयों पर लगाये गये है। अखबारों में प्रकाशित समाचारों से यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि जार्ज फर्नांडीस ने बहुत संपत्ति इकट्ठी कर ली है तथा संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। जबकि सभी जानते हैं कि जार्ज फर्नांडीज हर चुनाव में अपनी संपत्ति का विवरण देते रहे हैं। कई दशक पूर्व श्री जार्ज फर्नांडीज के साथियों ने मिलकर लगभग 20 लाख रूपये में बंगलोर के पास एक जमीन खरीदी थी। संपत्ति जार्ज साहब की
मां के नाम पर थी तथा पाॅवर आॅफ अटार्नी जार्ज के नाम पर मां के देहांत के बाद इस संपत्ति का चारों भाइयों में बंटवारा हुआ। सभी भाइयों ने अपना हिस्सा जार्ज साहब को दे दिया। पुश्तैनी संपत्ति का बंटवारा होने के बाद वह हिस्सा भी जार्ज साहब को मिला। समय के साथ जमीनों की कीमत बढ़ जाने के कारण कुल संपत्ति 16 करोड़ क हुई जिसमें से 3 करोड़ टैक्स दिया गया। इस राशि का इस्तेमाल वे एक केंद्र बनाकर करना चाहते थे। सभी जानते हैं कि हौजखास का मकान बंबई लेबर यूनियन की सम्पत्ति है। उसमें अभी द अदर साइड का कार्यालय है तथा जार्ज साहब की बायोग्राफी लिखने का काम वहां चल रहा है। यूनियन के कर्ताधर्ता शरदराव जी का कहना है कि जब तक जाॅर्ज हैं तब तक हम उस मकान को कब्जे में लेने नहीं जा रहे हैं। यह भी स्पष्ट है कि जार्ज साहब के भाई उस संपत्ति पर कोई दावा भी नहीं कर रहे हैं। भाइयों ने 23 जनवरी को बैंग्लौर में प्रेस कांफ्रेंस कर यह साफ किया कि वे संपत्ति पर कोई दावा नहीं कर रहे लेकिन यह जरूर चाहते हैं कि श्री जार्ज फर्नांडीज की इच्छा के अनुसार उस पूंजी का इस्तेमाल गरीबों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। लैलाजी ने इसपर
जवाबी बयान दिया है कि यदि गरीबों की इतनी चिंता है तो जार्ज के भाइयों को अपनी संपत्ति गरीबों में बांट देनी चाहिए। इस पर श्री जार्ज फर्नांडीज के भाइयों ने बयान दिया कि 18 दिसंबर 2009 को जार्ज साहब से खाली कागजों पर बिना किसी की उपस्थिति में अंगूठे लगवा लिये गये हैं तथा हस्ताक्षर कराये गये हैं। उल्लेखनीय है कि बैंक द्वारा जार्ज साहब के हस्ताक्षर बार-बार अलग तरीके के होने के कारण घरेलू खर्चे के लिए छोटी मोटी राशि निकालने हेतु जया जेटली जी को पाॅवर आॅफ अटाॅर्नी मददगार के रूप में दी गयी थी। जिसमें से केवल घर का खर्चा भर निकाला गया वह भी कुछ महीनों का। पहला काम लैलाजी और उनके बेटे ने यह किया कि पाॅवर आॅफ अटाॅर्नी को बिना जार्ज साहब की जानकारी के उनसे खाली कागजों पर अंगूठा लगवाकर रद्द करवाया। इस सबके बावजूद भी मसला कहीं से भी संपत्ति के विवाद का नहीं है। जहां तक व्यक्तिगत संबंधों का सवाल है हम जब 26 तुगलक क्रेसेंट से प्रतिपक्ष निकाला करते थे उसके बाद से लेकर अब तक लगभग दो दशक बीत जाने के बावजूद सार्वजनिक तौर पर कार्यक्रमों में, चुनाव प्रचार में श्री जार्ज फर्नांडीज के 25 बार से अधिक अस्पताल में भर्ती होने पर या डाॅक्टर के पास जाते वक्त किसी ने भी लैला जी को जार्ज फर्नांडीज के साथ नहीं देखा। भाइयों ने भी इस बात को प्रेस के समक्ष बार बार कहा है कि व्यक्तिगत तौर पर तथा राजनीतिक कार्यों में हम गत 25 वर्षों में
लगातार जयाजी को ही जार्ज फर्नांडीज के साथ देखते रहे हैं। लैला जी को नहीं। विशेषतौर पर गंभीर बीमारी की हालत में जिस तरह के घरेलू वातावरण की जरूरत है तथा एलजाइमर्स बीमारी में जिस तरह की देख-रेख की जरूरत है वह तनावपूर्ण वातावरण में संभव नहीं है। लेकिन लैलाजी एवं उनके बेटे के द्वारा अचानक 20 साल के बाद श्री जार्ज फर्नांडीज को अपनी संपत्ति मानकर जो कुछ किया जा रहा है वह अनावश्यक तथा आपत्तिजनक कहा जा सकता है। अधिकतर लोग मानते हैं कि यह निजी मसला है इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। मुझे याद है अकबरपुर में लोहिया मेले के आयोजन के बाद मेरी इस संबंध में जाॅर्ज साहब से बात हुई थी उन्होंने लगभग दपटते हुए तथा गुस्से के साथ कहा था कि मुझे अपने तरीके से अपनी जिंदगी जीने का अधिकार है। मुझ पर कोई भी अपनी पसंदगी नापसंदगी नहीं थोप सकता। मैं भी किसी के निजी जीवन में हस्तक्षेप नहीं करता। न ही यह चाहता हूं कि कोई मेरे जीवन में हस्तक्षेप करे। यह सब उन्होंने जया जी को लेकर कहा था। लेकिन जार्ज फर्नांडीज कभी व्यक्ति और परिवार केंद्रित नहीं माने गये। वे समाजवादी आंदोलन के नेता के तौर पर समाजवादी परिवार के अगुआ रहे ऐसे समय में जब जार्ज फर्नांडीज द्वारा पूरे जीवन में अर्जित की गयी छवि को सुनियोजित साजिश के तहत बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है तब यह जरूरी है कि उन्हें मानने वाले प्यार करने वाले प्रेरणा लेने वाले शुभचिंतक तथा समर्थक आगे आयें तथा जीते जी जार्ज फर्नांडीज की छवि को नष्ट भ्रष्ट करने की साजिश से उन्हें उबारें। जार्ज फर्नांडीज आजीवन लाखों ऐसे लेागों को आवाज देते रहे जो अपनी आवाज उठाने की स्थिति में नहीं थे। जिनकी आवाज कोई सुनने को तैयार नहीं था। मुझे लगता है कि आज स्वयं जार्ज फर्नांडीज को ऐसे लोगों की जरूरत है जो उनकी आवाज, उनकी पीड़ा को समाज और देश के सामने ला सकें। हो सकता है लोग यह कहें कि यह अनावश्यक हस्तक्षेप है लेकिन क्या पूरे मसले को कानूनी और व्यक्तिगत मसला मानकर छोड़ दिया जाना चाहिए? कानूनी स्थिति एकदम स्पष्ट है। उनकी पत्नी लैला तथा उनके बेटे का संपत्ति पर अधिकार है। उनके इस अधिकार को कोई चुनौती भी नहीं दे रहा है। शायद दे भी नहीं सकता। देने की जरूरत भी नहीं है। लेकिन यह
जानने का अधिकार जरूर है कि अचानक 20 साल बाद ऐसा क्या हुआ कि बेटा अमरीका से सीधे घर आकर पिताजी से हिसाब किताब करने लगा। फिर 20 वर्षों का आपसी संबंधों का भी हिसाब किताब होना ही चाहिए। कोई तथ्य या खबरें ऐसी नहीं हैं जिनसे यह मालूम पड़ता हो कि श्री जार्ज फर्नांडीज ने अपनी पत्नी और बेटे को घर से निकाला था। स्वेच्छा से लैलाजी पंचशील में अलग रह रही थीं। बेटा अमेरिका चला गया था। मां बेटे को केवल जार्ज फर्नांडीज को संपत्ति के नजरिये से देखने की इजाज नहीं दी जा सकती। हम सब मानते हैं कि महिला केवल किसी के साथ शादी हो जाने के चलते किसी की (पति की) संपत्ति नही हो जाती। इसी तर्ज पर कोई पति केवल शादी हो जाने के चलते किसी पत्नी की संपत्ति नहीं माना जा सकता। यह सवाल अति  संवेदनशील है इसलिए इसे व्यक्तिगत कहकर छोड़ दिया जाता है। एल्जाइमर्स बीमारी की छठी स्टेज में बीमार व्यक्ति आम स्वस्थ व्यक्तियों की तरह जीवन नहीं जी सकता। उसे इलाज के अलावा आत्मीयता, अपनेपन तथा उसकी जरूरत है (पेशेंट इज स्टिल नीडेड) इस बात का एहसास देने वाले वातावरण और व्यक्तियों की जरूरत होती है यह कार्य कोई पेशेवर नर्स के द्वारा नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता तो जार्ज फर्नांडीज को अमेरिका या भारत के किसी स्थान पर पेशेवर नर्स के हवाले छोड़ा जा सकता था। लेकिन यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। श्री जाॅर्ज फर्नांडीज की स्वास्थ्य संबंधी समस्या का कोई मैकेनिकल हल नहीं हो सकता। फिलहाल बाबा रामदेव द्वारा श्री जार्ज फर्नांडीज का इलाज किया जा रहा है हम सभी केवल दुआ ही कर सकते हैं कि वे स्वास्थ्य लाभ कर शीघ्र वापस लौटें लेकिन मेडिकल साइंस बताती है कि सुधार की गुंजाइश बहुत कम है। चमत्कारों को कोई नकार नहीं सकता। लेकिन यह तय है कि जाॅर्ज साहब इस समय जिनके कब्जे में हैं वे उनके साथ न्याय करने की स्थिति में नहीं होंगे। होना तो यह था कि लैलाजी यदि उन्हें लग रहा था कि जाॅर्ज साहब का ख्याल नहीं रखा जा रहा तो उनका ख्याल रखने वालों को बतातीं कि क्या कमी है। मैं जब भी जाॅर्ज साहब के पास गया उन्हें इत्मीनान से बात करते हुए पाया। देश के बड़े बड़े नेता दलाईलामा जी से लेकर मुलायम सिंह जी तक, अजय सिंह से लेकर स्वराज कौशल तक उनसे मिलते रहे। वे बड़े इत्मीनान से सभी से मिलते थे। मैं आश्चर्य चकित रह गया जब मुझे मालूम हुआ कि कुछ लोग जब जाॅर्ज साहब से मिलने पहुंचे तब आधे घंटे में जाॅर्ज साहब एक शब्द भी नहीं बोले। इसका मतलब है कि वे परेशान हैं। जब भी गुस्से में होते हैं तो बात करना बंद कर देते हैं। इस स्थिति में जाॅर्ज साहब के साथियों को चाहिए कि वे उनसे मिलें और पूछें कि जाॅर्ज आप क्या चाहते हो। उनके व्यक्तिगत जीवन में भी हस्तक्षेप किया जाना समय की आवश्यकता है साथ ही घर के लोगों को तथा मीडिया को यह सोचना जरूरी है कि उन्हें देश और समाज के लिए अपना पूरा जीवन लगा देने वाले नेता की छवि नष्ट भ्रष्ट करने से क्या हासिल होगा?
जो लोग जीवन भर जाॅर्ज फर्नांडीज से दुश्मनी मानते रहे वे लोग उनकी कमजोरी की हालत का लाभ उठाकर जब वे स्वयं को डिफेंड करने की स्थिति में नहीं हैं उन्हें साजिश पूर्ण तरीके से जीते जी मारने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कोशिश कामयाब न हो इसी मंशा से मैंने यह लेख तैयार किया है। सोचता हूं जाॅर्ज साहब यदि बोलने की स्थिति में होते तो क्या लैला जी या उनका बेटा या मीडिया की यह दुर्गति कर सकता था। कदापि नहीं। जो स्वयं को डिफेंड न कर सके उस पर हमला करना न केवल कायरता है बल्कि अनैतिक भी है। इसे यदि क्रूरता कहा जाय तो गलत नहीं होगा। देखना है कि इस क्रूरता के खिलाफ खुलकर बोलने के लिए कौन कौन सामने आता है। आता भी है या नहीं।

डॉ. सुनीलम

Sunday, February 7, 2010

lokayukt

आरोपों के घेरे में लोकायुक्त संगठन

प्रदेश के तीन आईएएस को दी क्लीन चिट




                                                              ex lokayukt ripusudan dayal


रवीन्द्र जैन
भोपाल। मध्यप्रदेश के लोकायुक्त संगठन पर आरोप है कि उसने प्रदेश के तीन आईएएस अधिकारियों के खिलाफ पहले तो जांच की तथा आरोप सिद्ध होने के बाद उन्हें को गलत तरीके क्लीन चिट दी है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने प्रहलाद पटेल ने इसकी शिकायत राज्यपाल से की लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का जिम्मा जिस लोकायुक्त संगठन पर है, वह भी विवादों से बचा नहीं है। इस संगठन में प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे बैठे हैं जिनके कार्यकाल में संगठन की छवि प्रभावित हुई है।

मप्र में भ्रष्टाचार अब चरम पर है लेकिन यह दुखद पहलू है कि भ्रष्टाचार रोकने का जिम्मा जिस लोकायुक्त संगठन पर है, वह भी बेदाग नहीं है। पिछले लोकायुक्त ने अपने पुत्र मोह व भोपाल में एक साथ तीन मकान खरीदने के लालच में इस संगठन की छवि को दागदार कर दिया था। अब भी इस संगठन की आज भी इस संगठन की छवि ऐसी नहीं है, जिससे भ्रष्टाचार रोकने की उम्मीद की जा सके। इस संगठन में अभी ऐसे अधिकारी बैठे हैं जो वर्षें से एक ही कुर्सी पर जमे हैं। जिन्होंने पिछले लोकायुक्त के सहीं गलत आदेशों को पालन किया था। पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने लोकायुक्त संगठन पर जिन आईएएस अधिकारियों को गलत तरीके से क्लीन चिट दी थी, उनके मामले में उन्होंने मप्र के आर्थिक अपराध ब्यूरो में नए सिरे से शिकायत भी की, लेकिन ब्यूरो ने भी इन ताकतवर अफसरों के खिलाफ जांच करना उचित नहीं समझा।

अधिकारी जिन्हें क्लीन चिट दी गई है :

1 - संजय बंधोपध्याय : तत्कालीन अपर कलेक्टर संजय बंधोपध्याय के खिलाफ लोकायुक्त विशेष पुलिस स्थापना ने अपराध क्रमांक 15/99 एवं 16/99 पंजीबंद्ध किया था। जांच के बाद संगठन के विधि सलाहकार ने अभियुक्त के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13/1 डी, 13/2डी एवं भारतीय दंड संहिता के धारा 420बी के तहत चालान पेश करने की अनुशंसा की थी। तत्कालीन लोकायुक्त के निर्देश पर संगठन के डीआईजी ने नियमों की परवाह किए बिना 5 अगस्त 2004 को जबलपुर विशेष स्थापना पुलिस को प्रकरण में खात्मा लगाने के आदेश दे दिए। इस मामले में विशेष स्थापना पुलिस ने फरवरी 2005 को कोर्ट में खात्मा प्रस्तुत कर दिया।









raghavchandea IAS

2 - राघवचंद्रा : यह मामला कटनी में मप्र गृह निर्माण मंडल के भूमि क्रय से संबंधित है। इस मामले में आवश्यकता से अधिक भूमि क्रय की गई तथा कई गुना राशि का भुगतान किया गया। इससे मंडल को 4 करोड़ 95 लाख 85 हजार 279 रूपए हानि हुई। लोकायुक्त ने इस मामले में भी जांच के बाद खात्मा लगा दिया, लेकिन कटनी विशेष न्यायालय ने 26 अप्रेल 2005 को खात्मा नामंजूर करते हुए अभियुक्त के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण कायम करने के निर्देश दिए। लोकायुक्त ने अपराध कायम करने के बजाय उच्च न्यायालय में रिवीजन लगाने के लिए राज्य के प्रमुख सचिव विधि को पत्र लिख दिया। इसी मामले में उच्च न्यायालय ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई करने के बाद लोकायुक्त के बजाय ईओडब्ल्यु से जाचं कराने के निर्देश दिए। यह जांच अभी लंबित है।






vishwapati travedi IAS

3 - विश्वपति त्रिवेदी : मप्र के तत्कालीन वाणिज्यकर आयुक्त विश्वपति त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त को शिकायत प्राप्त हुई जिसमें 16 गंभीर आरोप थे। इन शिकायतों में अधिकतर आरोप गलत तरीके से विभिन्न ईकाइयों को टैक्स एग्जम्पशन करने के लाभ पहुंचाने के थे। लोकाुरूकत ने इन 16 में से 7 आरोपों की जांच की, इनमें से दो आरोपों को समाप्त कर पांच मामलों की पूरक जांच की गई, और अंत में सभी मामलों को समाप्त कर दिया गया। जबकि इन मामलों में राज्य सरकार को करोड़ों रूपए की हानि हुई थी।

कहां है लोकायुक्त की रिपोर्ट

मप्र के लोकायुक्त सांगठन का कहना है कि वह हर साल अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देता है, लेकिन राज्य सरकार ने पिछले तीन साल से लोकायुक्त की रिपोर्ट को दबा रखा है। पिछले तीन साल से पहले तक मप्र में लोकायुक्त की रिपोर्ट हरहाल में मार्च माह में विधानसभा के पटल पर रख दी जाती थी, लेकिन पिछले तीन सालों से यह रिपोर्ट मंत्रालय के सामान्य प्रशासन विभाग में धूल खा रही है। पिछले दिनों में विधानसभा की एक कमेटी ने इस संबंध में सामान्य प्रशासन के अधिकारियों को बुलाकर रिपोर्ट पटल पर रखने के निर्देश भी दिए थे। यहां बता दें कि पिछले दिनों तत्कालीन लोकायुक्त रिपुसूदन दयाल ने मामूली विवाद के बाद राज्य सरकार को चेतावनी दी कि उस में दम है तो वह उनकी रिपोर्ट को सदन में पेश करके दिखाए।

जमे बैठे हैं अधिकारी

लोकायुक्त संगठन में पुलिस महानिदेशक से लेकर एसपी स्तर के अधिकारी वर्षों से जमे हैं, जबकि अभी तक की परंपरा रही है कि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी तीन-तीन वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर संगठन में भेजे जाते थे। यहां अधिकारी सात साल से ज्यादा समय से जमे हुए हैं।

Friday, February 5, 2010

income tax




फर्जी बैंक खातों में मिले चालीस करोड़


आयकर विभाग भी इसे अब तक की सबसे उपलब्धि मान रहा है









रवीन्द्र जैन

भोपाल। मप्र और छत्तीसगढ़ में आईएएस अधिकारियों के घर में पड़े आयकर छापे में शुक्रवार को चौंकाने वाले जानकारी सामने आई है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख सचिव कृषि बीएल अग्रवाल के सीए के कार्यालय से आयकर विभाग को 220 बैंक पासबुकें मिली हैं। यह सभी खाते फर्जी नामों से खोले गए हैं तथा इन बैंक खातों में चालीस करोड़ रूपए जमा करके उसे अग्रवाल के परिजनों की कंपनी में निवेश किया है। इसके अलावा मप्र के प्रमुख सचिव अरविन्द जोशी व टीनू जोशी का घर से शुक्रवार को भी नगद राशि मिलने का सिलसिला जारी रहा। अब तक उनके दो घरों से 3 करोड़ 4 लाख रूपए नगद बरामद हो चुके हैं।
आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार गुरूवार को तड़के शुरू हुई छापों की कार्यवाही शुक्रवार की देर रात तक जारी रहने की संभावना है। इन छापों में विभाग को कुल 14 लॉकरों के अलावा जमीनों व मकानों से संबंधित अनेक दस्तावेज हाथ लगे हैं जिनका परीक्षण कराने के बाद ही विभाग इनकी कुल सम्पत्ति के बारे में सही जानकारी दे सकेगा। अभी तक दो अधिकारियों ने विभाग के सामने कुल 85 लाख रूपए भी सरेन्डर कर दिए हैं। इनमें 50 लाख रूपए पीडब्ल्युडी के एक्जीक्युटिव इंजीनियर रामदास चौधरी ने तथा 35 लाख रूपए पीडब्ल्युडी के प्रभारी मुख्य अभियंता दीपी असाई ने सरेन्डर किए हैं। विभाग को मप्र के आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी व टीनू जोशी के घर से उनके पुत्र निशांत जोशी की भोपाल के व्यवसायी कैलाश अग्रवाल व उनके दोनों पुत्रों सुनील व पवन अग्रवाल के साथ आठ से अधिक कंपनियों में भागीदारी की भी जानकारी मिली है।
आयकर विभाग के महिानिदेशक ब्रजेश गुप्ता ने बताया कि - रायपुर में सीए के यहां से लगभग 220 बैंक पास बुकें मिलीं थी। विभाग की जांच में यह पता चला है कि उक्त सभी खाते जिन लोगों के नामों से खाले गए थे उन्हें इनके लेनदेन की जानकरी भी नहीं है। इन खातों में 22 करोड़ रूपए नगद व 18 करोड़ रूपए चेक द्वारा जमा किए गए। बाद में यह रकम निकालकर बाबूलाल अग्रवाल के परिजनों की कंपनियों में अलग अलग नामों से निवेश की गई है। मप्र के सेवा निव्तत आईएसस अधिकारी एमए खान के घर से आयकर विभाग को नगद के रूप में मात्र 68 हजार रूपए मिले हैं। इसके अलावा लगभग 15 लाख के जेबर व लॉकर मिले हैं। विभाग ने खान के घर से बेनामी सम्पत्ति से संबंधित कागज जप्त किए हैं जिनकी जांच होना है।
आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी व टीनू जोशी के 74 बंगला स्थित निवास से शुक्रवार की शाम तक विभाग को कुल 3 करोड़ 4 लाख रूपए नगद, लगभग तीन करोड़ रूपए बीमा कंपनी में निवेश संबंधी कागज, 8.36 लाख के जेबर, 7 लाख रूपए की विदेशी मुद्रा तथा एक लॉकर मिला है। उनके पिता मप्र के रिटायर पुलिस प्रमुख एचएम जोशी के अरेरा कॉलेानी स्थित घर 1.99 लाख नगद, 6.27 लाख के जेबर के अलावा जोशी के कैलाश अग्रवाल की कंपनी में पार्टनरशिप के कागज भी मिले हैं। एचएम जोशी के पांच लॉकरों भी विभाग ने सील कर दिए हैं। इन अफसरों को पैसा निवेश कराने वाली सीमा जायसवाल के घर से विभाग को 3.59 लाख रूपए नगद व 10 लाख के जेबर के अलावा उनके लॉकर से 1.90 नगद व 6 लाख के जेबर मिले हैं। आयकर विभाग ने रायपुर में प्रमुख सचिव $कृषि बाबूलाल अग्रवाल व उनके परिजनों के यहां से 52 लाख नगद व 73 लाख रूपए के जेबर बरामद किए हैं। इनकी कंपनियों में 40 करोड़ रूपए के फर्जी निवेश की भी पुष्टि हुई है। भोपाल के व्यवसायी कैलाश अग्रवाल के यहां से लाखों रूपए नगद व जेबर के अलावा करोड़ों रूपए के निवेश के कागज मिले हैं।






IAS OFFICERS IN MP

अब बड़े मगरमच्छ हैं आयकर के निशाने पर

आने वाले दिनों में होंगी बड़ी कार्यवाहियां














रवीन्द्र जैन

भोपाल। मप्र में अब बड़े मगरमच्छ आयकर विभाग के निशाने पर आ गए हैं। प्रदेश के इतिहास में पहली बार विभाग ने प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों पर सीधा हाथ डाला है। अब विभाग की नजर बड़े और भ्रष्ट राजनेताओं पर हैं जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में ही करोड़ों रूपए की सम्पत्ति बनाई है। आयकर विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि - अब मप्र में मीडिया को हमारे यहां के लिए अलग से संवाददाता नियुक्त करना होगा, क्योंकि हम इतनी खबरें देने की तैयारी में हैं।

मध्यप्रदेश में आयकर विभाग ने बड़े लोगों को चिन्हित कर लिया है, और अब उनके खिलाफ कार्यवाही तेज होने की संभावना है। अभी तक आयकर विभाग, छोटे मोटे अफसरों के यहां ही छापे मारता था, लेकिन अब उसके निशाने पर बड़े अधिकारियों के साथ प्रदेश के वे राजनेता भी हैं जिन्होंने रातोंरात करोड़ों रूपए कमाए हैं। इनमें वे मंत्री भी शामिल हैं जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में मप्र में जमकर निवेश किया है। जिन नेताओं ने अपने रिश्तेदारों के नाम से प्रदेश में करोड़ों रूपए की जमीनें खरीद कर कॉलेज खोले हैं, वे भी आयकर विभाग के निशोन पर हैं।

अफसरों में गुटबाजी : इस संबंध में शुक्रवार को एक आईएएस अधिकारी ने सवाल दागा कि क्या प्रदेश में आईएएस अधिकारी ही भ्रष्ट हैं? आज तक किसी आईपीएस के यहां छापे की कार्यवाही क्यों नहीं हुई। जबकि सभी को पता है कि परिवहन विभाग में बैठे आईपीएस अफसरों की कितनी कमाई है।



कई आईएएस लोकायुक्त के घेरे में

मध्यप्रदेश के तीन दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारी लोकायुक्त संगठन के घेरे में है। लोकायुक्त संगठन ने मार्च 2009 तक की जारी सूची में बताया है कि प्रदेश के तीस आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आईं शिकायतों की जांच संगठन कर रहा है। इनमें से तीन अधिकारियों की जांच पूरी करने के बाद संगठन ने राज्य सरकार को अपनी अनुशंसा भी भेज दी है।

दागी अफसरों के नाम व आरोप



अधिकारी का नाम - मनीष श्रीवास्तव
आरोप - त्रैमासिक अर्धवार्षिक परीक्षा के मुद्रण कार्य में घेटाला

अधिकारी का नाम - अरूण पांडे
आरोप - खनिज लीज में ठेकेदारों को अवैध लाभ पंहुचाना

अधिकारी का नाम - प्रभात पाराशर
आरोप - वाहनों के क्रय में 5 लाख से अधिक का भ्रष्टाचार

अधिकारी का नाम - गोपाल रेड्डी
आरोप - कालोनाईजरों को अनुचित लाभ पहुंचाना, शासन को आर्थिक हानि पहुंचाना

अधिकारी का नाम - अनिता दास
आरोप - ऊन तथा सिल्क साडिय़ों के क्रय में भ्रष्टाचार

अधिकारी का नाम - दिलीप मेहरा
आरोप - कार्यपालन यंत्री से अधीक्षण यंत्री की पदोन्नति में अनियमितताएं

अधिकारी का नाम - मोहम्मद सुलेमान
आरोप - कालोनाईजरों को अवैध लाभ पंहुचाना

अधिकारी का नाम - टी राधाकृष्णन
आरोप - दवा खरीदी में अनियमितताएं

अधिकारी का नाम - एसएस उप्पल
आरोप - पांच लाख रूपए लेकर भूमाफियाओं को अनुज्ञा दी

अधिकारी का नाम - अस्ण भट्ट
आरोप - भारी रिश्वत लेकर निजी भूमि में अदला बदली

अधिकारी का नाम - निकुंज श्रीवास्तव
आरोप - पद का दुरूपयोग एवं भ्रष्टाचार, दो शिकायतें

अधिकारी का नाम - एमके सिंह
आरोप - तीन करोड़ रूपए का मुद्रण कार्य आठ करोड़ रूपए में कराया

अधिकारी का नाम - एमए खान
आरोप - भ्रष्टाचार एवं वित्तिय अनियमितताएं, तीन शिकायतें

अधिकारी का नाम - संजय दुबे
आरोप - शिक्षाकर्मियों के चयन में अनियमितताएं

अधिकारी का नाम - रामकिंकर गुप्ता
आरोप - इंदौर योजना क्रमांक 54 में निजी कंपनी को सौ करोड़ रूपए का अवैध लाभ पंहुचाया

अधिकारी का नाम - एमके वाष्णेय
आरोप - सम्पत्तिकर का अनाधिकृत निराकरण करने से निगम को अर्थिक हानि

अधिकारी का नाम - आरके गुप्ता
आरोप - निविदा स्वीकृति में अनियमितताएं

अधिकारी का नाम - एन्टोनी डिसा
आरोप - निविदा स्वीकृति में अनियमितताएं

अधिकारी का नाम - केदारलाल शर्मा
आरोप - सेन्ट्रीफयूगल पम्प क्रय में अनियमितताएं

अधिकारी का नाम - शशि कर्णावत
आरोप - पद का दुरूपयोग, दो शिकायतें

अधिकारी का नाम - केके खरे
आरोप - पद का दुरूपयोग कर भ्रष्टाचार

अधिकारी का नाम - विवेक अग्रवाल
आरोप - 21 लाख रूपए की राशि का मनमाना उपयोग

अधिकारी का नाम - एसके मिश्रा
आरोप - खनिज विभाग में एमएल, पीएल आवंटन में भ्रष्टाचार

अधिकारी का नाम - राकेश साहनी
आरोप - पुत्र को 5 लाख रूपए कम में विमान प्रशिक्षण दिलाया

अधिकारी का नाम - महेन्द्र सिंह भिलाला
आरोप - 75 लाख रूपए की खरीदी में अनियमितताएं

अधिकारी का नाम - अल्का उपाध्याय
आरोप - भारी धन राशि लेकर छह माह तक दवा सप्लाई के आदेश जारी नहीं किए

अधिकारी का नाम - सोमनाथ झारिया
आरोप - 4 वर्षों से भ्रष्टाचार एवं पद का दुरूपयोग करना

अधिकारी का नाम - डा. पवन कुमार शर्मा
आरोप - बगैर रोड़ बनाए ठेकेदार को पांच लाख का भुगतान करना

नहीं देते सम्पत्ति का ब्यौरा :

मप्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सभी अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 के अंतर्गत प्रत्येक कलेन्डर वर्ष के लिए चल अचल सम्पत्ति का ब्यौरा शासन को प्रस्तुत करना चाहिए, लेकिन मप्र में 44 आईएएस अधिकारी ऐसे हें जिन्होंने वर्ष 2008 के लिए अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा प्रस्तुत नहीं किया है।

सम्पत्ति का ब्यौरा नहीं देने वाले आईएएस अधिकारी

- दिलीप मेहरा
- गोपाल प्रसाद सिंघल
- एमएम उपाध्याय
- राकेश अग्रवाल
- सेवाराम
- केपी सिंह
- प्रवीर कृष्ण
- संजय बंदोउपाध्याय
- विनोदकुमार
- कोमलसिंह
- पीके पाराशर
\- एसएन मिश्रा
- प्रमोद अग्रवाल
- एमके वाष्णेय
- रघुवीर श्रीवास्तव
- केएम गौतम
- अनिरूद्ध मुखर्जी
- वीणा घाणेकर
- मनीष रस्तोगी
- सूरज डामोर
- विवेक अग्रवाल
- एमएस भिलाला
- डीपी अहिरवार
- भरत कुमार व्यास
- राजकुमार पटेल
- जेटी एक्का
- शिवानंद दुबे
- उमाकांत उमराव
- जगदीश शर्मा
- केके खरे
- मधु खरे
- मनीष सिंह
- सुखवीर सिंह
- राजेश प्रसाद मिश्रा
- मुकेश चंद्र गुप्ता
- एसएस अली
- अनिल यादव
- विवेक पोरवाल
- शोभित जैन
- चंद्रशेखर बोरकर
- गीता मिश्रा
- शशि कर्णावत
- राहुल जैन
- मनेाहर दुबे

Wednesday, February 3, 2010

vidhansabha

भारत में कहीं भी रहने
की आजादी : मीराकुमार

रवीन्द्र जैन

भोपाल। लोकसभा स्पीकर सुश्री मीराकुमार ने स्पष्ट कहा है कि - भारत में किसी भी नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में रहने का पूरा अधिकार है। भारत का हर नागरिक देश के किसी भी प्रांत में रहने के लिए स्वतंत्र है। मीराकुमार भोपाल में पत्रकारों से चर्चा कर रहीं थीं। वे शिवसेना पर प्रतिबंध लगाने के सवाल को टाल गईं। उन्होंने देश में बढ़ती मंहगाई पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जाएगी।


शिवसेना द्वारा मुम्बई में मराठियों का नगर बताने के विवाद के बारे में मीराकुमार ने कहा कि - इस मुद्दे पर कुछ बोलने की जरूरत नहीं है। इस विवाद को न बोलकर ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि - मेरी मान्यता है कि देश में रहने वाला हर व्यक्ति देशभक्त है और किसी को भी ऐसी बात नहीं करना चाहिए। जानीमानी फिल्म अभिनेत्री व समाजवादी पार्टी से निष्कासित सांसद जयाप्रदा की लोकसभा सदस्यता के बारे में उन्होंने कहा कि - किसी भी पार्टी से निष्कासन के बाद भी किसी संसद सदस्य की सदस्यता समाप्त नहीं होती, लेकिन फिर भी जयाप्रदा के मामले में सम्पूर्ण जानकारी सामने आने के बाद ही वे कुछ कह सकेंगीं।


देश में बढ़ती मंहगाई के बारे में जब लोकसभा अध्यक्ष से सवाल पूछा तो वे एकदम भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर व चिन्ता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश का आम आदमी बढ़ती मंहगाई से पेरशान है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर लोकसभा के अगले सत्र में चर्चा कराई जाएगी। सांसदों की स्वेच्छा निधि दो करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ करके बारे में मीराकुमार ने कहा कि - स्वेच्छा निधि के दुरूपयोग को रोकने के लिए उसके व्यय के संबंध में मोनिटरिंग जरूरी है।

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पीठासीन अधिकारी सम्मेलन दूसरा दिन



विधायी निकाय स्वयं
का मूल्यांकन
करें : मीराकुमार










RAVINDRA JAIN

भोपाल। देश में सभी विधायी निकायों को अपने कार्यों का स्वयं मूल्यांकन करना चाहिए कि - वे लोगों की इच्छाओं, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करने के कार्य में कहां तक सफल हुए हैं। यह बात लोकसभा अध्यक्ष सुश्री मीराकुमार ने बुधवार को भोपाल में देश के सभी विधायी निकायों के स्पीकर, डिस्टी स्पीकर व सचिवों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मप्र विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने कहा कि - वर्तमान में स्पीकरों पर ही पक्षपात का आरोप लगे हैं, स्पीकर का काम तलवार की धार पर चलने जैसा हो गया है।

बुधवार को मीराकुमार के विधानसभा सचिवालय पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ आनर दिया गया। उन्होंने लोकसभा सचिवालय व मप्र सराकर द्वारा लगाई गईं प्रदर्शनियों का भी शुभांरभ किया। इसके बाद उन्होंने पीठासीन अधिकारियों के 74 वें सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करते हुए कहा कि - यह गर्व की बात है कि आजादी के बाद पहली बारे लोकसभा में महिला सदस्यों की संख्या 59 हो गई है। उन्होंने देश में आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि मुम्बई हमले के बाद हमने एक प्रस्ताव पास कर इसकी निन्दा की थी, लेकिन संसद ने इन हमलों की जांच के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण विधेयक भी पारित किया है। उन्होंने कहा कि देश में छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा अनिवार्य करने के लिए संसद ने अनिवार्य बाल शिक्षा का विधेयक भी पारित किया है। देश में अनुसूचित जाति, जनजाति को आरक्षण देने की समय सीमा 25 जनवरी 2010 को समाप्त हो रही थी, लेकिन संसद को यह मानना है कि - देश में अभी भी यह वर्ग सामान्य वग्र के बरागरी पर नहीं आए है, इसलिए संसद ने संविधान में 109 वां संशोधन करके आरक्षण की अवधि को दस साल के लिए बढ़ाया है।

स्वयं मूल्यांकन करें : मीराकुमार ने कहा है कि - संसदीय कार्यों के निष्पादन में हमारे विधान मंडलों का लगातार गिरता स्तर सबकी चिन्ता का विषय है। विधान मंडलों में होने वाले वाद विवाद व चर्चाएं , अब व्यवधानों, टकरावों औा विभिन्न गैर लोकतांत्रिक कार्यों के कारण बाधित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि - अब समय आ गया है कि देश के सभी विधायी निकाय अपने कार्य का स्वयं मूल्यांकन करें कि वे जनता की अपेक्षाओं पर कितनी खरा साबित हो रहे हैं। उन्होंने विधायी निकाय के अध्यक्षों की भूमिका के बारे में कहा कि विधायी संस्थाओं के गौरव औा प्रतिष्ठा की रक्षा करने में अध्यक्ष की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को प्राप्त विश्वास ही संसदीय प्रशासन का केन्द्र होता है।

संसद भवन को बचाना है : मीराकुमार ने कहा कि संसद भवन का निर्माण 1920 में हुआ था। पिछले कुछ दशक में स्थान की कमी के कारण संसद भवन में कुछ परिवर्तन किए गए हैं जो कि इस भवन की वास्तुकलात्मकता के अनुकूल नहीं है। संसद भवन के मूल स्वरूप को बचाने के लिए संसदीय समिति का गठन किया गया है।

स्पीकर का काम जटिल हुआ : मप्र विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने लोकसभा अध्यक्ष सहित देश भर से आए विधानसभाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों का स्वागत करते हुए कहा कि - अब स्पीकर का काम काफी जटिल हो गया है। उन्होंने कहा कि सदन का संचालन करने के लिए स्पीकरों को काफी मसक्कत करनी पडती है। आज सदनों का जो स्परूप बनता है उसके कारण आसंदी को भी कई बार

आग्रहों,पूर्वाग्रहों और आरोपों के घेरे में ले लिया जाता है। जबकि पीठासीन अधिकारी भी सदन का सेवक होता है और वह सदन से ही शक्तियां प्राप्त करता है। स्पीकर ही सदन की आसंदी को गरिमा व सम्मान दिलाता है, अत: स्पीकर की तटस्थता, निष्पक्षता और निर्णयों को स्वीकार किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है, उल्टे आंसदी से बहस की जाती है। ऐसे माहौल में पीठासीन अधिकारी का काम दोधारी तलवार चलने जैसा हो गया है।



सुदामा के तंदुल

मप्र के विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने अपने उद्बोधन में कहा कि - पीठासीन अधिकारियों का इतना बड़ा कार्यक्रम कराने के लिए मप्र के पास साधन सीमित थे, इसलिए हम सभी अतिथियों को थयोचित सुख सुविधा उपलब्ध नहीं करा सके, लेकिन हमारा जो सत्कार है, उसे सुदामा के चावल की तरह स्वीकार करें। इसके जबाव में लोकसभा अध्यक्ष मीराकुमार ने कहा कि यह सुदामा के तंदुल नहीं है, वे यहां के स्वागत से अभिभूत हैं तथा इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष व उनके सभी सहयोगियों को धन्यवाद देती हैं।



शिव जमुना भी याद आए

इस आयोजन के लिए रोहाणी ने मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी, विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह, मुख्यसचिव व पुलिस महानिदेशक के प्रति भी आभार व्यक्त किया।



मीराकुमार विफोर

लोकसभा अध्यक्ष मीराकुमार मप्र विधानसभा में निर्धारित समय से लगभग दस मिनिट पहले पहुंच गईं, जिस कारण मप्र के विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहापणी उनकी अगवानी नहीं कर पाए। बुधवार को स्रबह नौ बजे मीराकुमार को विधानसभा पहुंचना था, लेकिन वे पहले आ गईं व रोहाणी बाद में पहुंचे।



श्रृद्धाजलि

सम्मेलन के शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष मीराकुमार ने पिछले एक साल में दिवंगत हुए देश भर के विधायी निकायों के पूर्व, उपाघ्यक्षों को श्रृद्धाजीलि दी। उनके सम्मान में दो मिनिट का मौन भी रखा गया।

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सम्मेलन की झलकियां

गोवा के सचिव बीमार, अस्पताल में भर्ती

- सम्मलेन के पहले दिन दोपहर में भोजन करने के तुरंत बाद गोवा विधानसभा के सचिव जेएन ब्रगांजा का ब्लड प्रेशर बढ़ गया। उन्हें तत्काल हमीदिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया।

- जिस समय संसद व विधानसभा के सचिव बैठक में व्यस्त थे, उनकी पत्नियां विधानसभा की महिला कर्मचारियों के साथ भारत भवन का भ्रमण कर रहीं थीं। उनके लिए पर्यटन विकास निगम ने एयरकंडीशन बस की व्यवस्था की थी।

- सोमवार की शाम को एयरपोर्ट पर आए कई अतिथियों के वाहन समय से नहीं पहुंच सके, तो उन्होंने अपना विरोध जताया। अतिथियों का सामान उठाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं थी। इस कारण वे अपना सामान स्वयं उठाए नजर आ रहे थे।

- राज्यकीय अतिथि का दर्जा होने के बाद भी कई अतिथियों के वाहनों पर लाल बत्ती न होने पर उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त कर दी है।

- अतिथियों के लिए पर्यटन विकास निगम ने 191 वाहन लगाए हैं, लेकिन इनमें से कई वाहन भोपाल के बाहर से आए हैं जिनके चालकों को भोपाल की सड़कों की जानकारी नहीं होने से वे अतिथियों को साथ लेकर जगह जगह रूक रास्ता पूछते नजर आ रहे हैं। कई अतिथियों ने इस पर आपत्ति करते हुए अपने वाहन चालक बदलने की मांग की है।

- मंगलवार को सचिवों की बैठक में उत्तरप्रेदश, त्रिपुरा व असम विधानसभा के सचिव शामिल नहीं हुए। इसके अलावा जम्मू कश्मीर विधान मंडल के सचिव भी बैठक में नहीं आए।

- हिन्दी भाषी राज्य में हो रहे सम्मेलन की पूरी कार्यवाही अंग्रेजी में हो रही है। यहां तक कि शाम सात बजे तक मीडिया के लिए हिन्दी में प्रेसनोट भी तैयार नहीं हो सका।

- सम्मेलन में देश भर से व्हीआईपी आए हैं, लेकिन मंगलवार को विधानसभा में राज्य सरकार की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी दिखाई नहीं दिया।

- सम्मेलन की पूरी व्यवस्था राज्य पर्यटन विकास निगम संभाल रहा है।

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विश्वास मत पहले या
राज्यपाल का
अभिभाषण ?

कई गंभीर विषयों पर चर्चा

रवीन्द्र जैन

भोपाल। आम चुनाव होने के बाद यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता तो जोड़तोड़ से बनी सरकार के मामले में राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल का अभिभाषण पहले होना चाहिए या पहले सरकार को अपना बहुमत सिद्ध करना चाहिए? यदि किसी सदन के कई सदस्य सामूहिक त्यागपत्र देते हैं तब स्पीकर की क्या भूमिका होनी चाहिए? सदन की बैठकों में विधायकों की अरूचि व उपस्थिति में कमी के मामले में क्या करना चाहिए? सदन में प्रश्रकाल को प्रभावी कैसे बनाया जा सकता था? इन गंभीर विषयों पर मंगलवार को देश भर की संसदीय संस्थाओं के प्रमुख सचिव व सचिव विचार मंथन करेंगे।


मप्र की राजधानी भोपाल में बीस साल बाद हो रहे पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन मंगलवार को सुबह विधानसभा में शुरू होगा। सम्मेलन के पहले दिन सुबह दस बजे सभी संसदीय संस्थाओं के सचिवों के सम्मेलन में चर्चा के लिए सबसे पहला विषय राष्ट्रपति व राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर है। दरअसल आम चुनावों में स्पष्ट बहुतम न मिलने के बाद भी जोड़तोड़ से सरकारें बन तो जाती हैं, लेकिन वे सदन में अपना बहुतम सिद्ध नहीं कर पातीं। बिना बहुमत सिद्ध किए राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल अपने अभिभाषण में सरकार की नीतियों के बारे में अभिभाषण करते हैं। लोकसभा सचिवालय ने इस विषय को सचिवों की बैठक में चर्चा के लिए रखा है। सभी राज्यों के सचिवों से राय लेने के बाद संसद इस बारे में सरकार को अपनी अनुशंसा भेजेगी।


इसके अलावा आंध्रप्रेदश में तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर विधायकों के सामूहिक त्यागपत्र के बारे में भी चर्चा होनी है। आंध्रप्रदेश विधानमंडल ने यह विषय चर्चा के लिए बैठक में रखा है। विधायकों के सामूहिक इस्तीफा तथा उसके प्रभाव व स्पीकर की भूमिका को लेकर गंभीर चर्चा होने की संभावना है। राज्यसभा सचिवालय ने प्रश्रकाल को अधिक कुशल एवं प्रभावी बनाने के उपायों के बारे में चर्चा का अनुरोध किया है। प्रश्रकाल में उठाए जाने वाले विषय, संबंधित विभाग के मंत्री का जबाव व सांसदों व विधायकों की उपस्थिति आदि को प्रभावी बनाने पर चर्चा होगी।


सदन से गायब रहते हैं सदस्य : इस बैठक में सबसे गंभीर मुद्दे के रूप में संसद व विधान मंडलों में गंभीर विषयों पर चर्चा, खासकर विधेयकों पर वाद विवाद के समय सदस्यों की भागीदारी व उपस्थिति में निरंतर कमी के बारे में चर्चा की जाएगी। यह विषय चर्चा के लिए उत्तरप्रदेश विधानसभा ने रखा है। बैठक में आंध्रप्रदेश विधानसभा के आग्रह पर विधायिका व निर्वाचन आयोग द्वारा बनाई गई आचार संहिता के पालन के बारे में चर्चा करने का निर्णय लिया गया है।


संसदीय संस्थाओं के अधिकार : संसदीय संस्थाओं के सचिवों का सम्मेलन हो और वे अपने अधिकारों को लेकर चर्चा न करें ऐसा नहीं हो सकता। इस बैठक में संसद व विधायिका सचिवालयों को वित्तीय स्वायत्तता देने के मुद्दे पर भी चर्चा होगी। यह विषय चर्चा के लिए लोकसभा सचिवालय ने एजेन्डे में शामिल कराया है। लोकसभा सचिवालय ने ही संसदीय समिति के समक्ष दिए साक्ष्य की तुलना में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दिए जाने वाले खुलासों में गोपनीयता एवं समिति के सदस्यों के हितों में टकराव के विषय को चर्चा के लिए एजेंडे में शामिल कराया है।


बीस साल पहले और अब

बीस साल पहले 19 सितंबर 1989 को मप्र विधानसभा में ही संसदीय संस्थाओं के सचिवों के सम्मेलन में महत्वपूर्ण विषयें पर चर्चा की गई। भोपाल की चर्चा के बाद ही देश भर के कॉलेजों व स्कूलों में मॉक संसद व विधानसभा लगना शुरू हुई थीं। इसके अलावा उस सम्मेलन में ही संसदीय संस्थाओं में काम करने वालों के विशेष प्रशिक्षण देने का निर्णय हुआ था।




बीस साल पहले का एजेंडा :


- देश में दलबदल कानून लागू होने के बाद राजनीतिक दल की परिभाषा क्या होना चाहिए।
- भ्रष्टाचार को रोकने में मददगार सरकारी विभागों की वार्षिक रिपोट्स को समयसीमा में सदन के पटल पर रखने पर विचार।
- सदन की समितियों की भूमिका पर विचार।
- संसदीय संस्थाओं में काम करने वालों को प्रशिक्षण की व्यवस्था।
- मॉडल पार्लियामेंट के लिए स्कूल कॉलजों में प्रतियोगिताओं पर विचार।
- संसदीय संस्थाओं में फैक्स व


इस बार का एजेंडा :


- आम चुनाव के बाद बहुमत सिद्ध करने के लिए विश्वास मत: राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल का अभिभाषण इससे पहले होना चाहिए या बाद में ?
- सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से त्यागपत्र दिया जाना तथा उसका प्रभाव।
- प्रश्रकाल को और अधिक कुशल और प्रभावी बनाना।
- विधेयकों पर वाद विवाद और सदन की बैठक में सदस्यों की भगीदारी और उपस्थिति में कमी।
- विधायिका और निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित आदर्श आचार संहिता।
- संसद तथा विधायिका सचिवालयों को वित्तीय स्वायत्तता।
- संसदीय समिति के समक्ष दिए जाने वाले साक्ष्य की तुलना में सूचना का अधिकार 2005 के तहत दिए जाने वाले खुलासों में गोपनीयता।
- समितियों के सदस्यों के हितों में टकराव, निष्पक्ष और उचित दृष्टिकोण की आवश्यकता।