Monday, December 13, 2010

शराब की गिरफ्त में मासूम

'' रायरू (ग्वालियर) डिस्टलरीज में बच्चे कर रहे शराब व शराब बनाने वाली स्प्रिट व एनई तैयार, साथ ही कर रहे है शराब की बॉटलिंग।











कौशल मुदगल/विकास पांडे

ग्वालियर । बेशक नाबालिग बच्चों से काम कराना और उन्हें शराब कारोबार में उपयोग करना गैरकानूनी हो, लेकिन ग्वालियर स्थित रायरू (ग्वालियर) डिस्टलरीज में यह सारे गैरकानूनी काम बेधड़क होते हैं। नामचीन शराब कंपनियों के लिए शराब और शराब तैयार करने वाली स्प्रिट व एनई इस फैक्ट्री में इन बच्चों से बनवाई जाती है।

शहर से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित इस फैक्ट्री में कभी श्रम विभाग की टीम ने भी झांकने की कोशिश नहीं की है, क्योंकि विभागीय अधिकारियों को मंथली सेवा शुल्क मिलता है। इतना ही नहीं जब ग्वालियर में पदस्थ सहायक श्रम आयुक्त आरएस यादव से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभाग ने अभी तक रायरू डिस्टलरीज का कोई निरीक्षण नहीं किया है, लेकिन यदि वहां बालश्रम के सबूत उपलब्ध हो तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी। आधा दर्जन गांवों से अधिक घिरी इस फैक्ट्री में ग्रामीणों को रोजगार देने के नाम पर फैक्ट्री प्रबंधन नाबालिग बच्चों से काम करा रहा है। बच्चे स्प्रिट, एनई व शराब के कैमिकलों के दुष्प्रभावों से गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं साथ ही शराब के नशे के आदी भी हो रहे हैं। क्योंकि उन्हें अभी मुफ्त की शराब पीने को मिल रही है और ये बच्चे शराब की बोतलें साथ ले जाते हैं जो गांव में बिकती भी हैं।

दस घंटे काम, ढाई हजार वेतन...

रायरू डिस्टलरीज में बच्चों को लेबर के रूप में इसलिए भी उपयोग किया जा रहा है क्योंकि बच्चें कम पैसे में काम करते हैं और मैनेजमेंट बच्चों को डरा- धमकाकर अधिक काम करा लेता है। बताया गया है कि इस फैक्ट्री में बच्चों को आठ से दस घंटे की नौकरी के बदले महज ढाई हजार रुपए दिए जाते हैं। शराब फैक्ट्री में बच्चों द्वारा काम किए जाने की शिकायत कई बार श्रम कार्यालय में की गई, लेकिन मंथली सेवा शुल्क मिलने के कारण अधिकारियों ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की।

कागजों में मॉनिटरिंग.....

जिन स्थानों पर शराब तैयार होती है या शराब की बॉटलिंग की जाती है वहां नाबालिग बच्चे काम नहीं करें। इसके लिए श्रम विभाग के अधिकारियों की एक टीम को लगातार मॉनिटरिंग करनी चाहिए, लेकिन ग्वालियर डिस्टलरीज में ऐसा नहीं है। यहां मॉनिटरिंग कागजों में होती है और श्रम विभाग के अधिकारी अपनी जेब भरने में मशगूल रहते हैं।

सजा का प्रावधान.....

0 फैक्ट्र्री एक्ट अधिनियम 1948 के अन्तर्गत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराए जाने पर धारा 67 के अन्तर्गत 50 हजार का जुर्माना तथा 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

0 प्लानटेशन लीगल एक्ट 1951 के अन्तर्गत नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने पर धारा 24 के तहत जुर्माने के साथ 2 वर्ष का कारावास हो सकता है।

इनका कहना है.....

संयुक्त कार्रवाई करेंगे.....

'' बाल श्रमिकों के मामले में कार्रवाई का अधिकार श्रम विभाग के पास है इसके बाद भी यदि शराब फैक्ट्री में बच्चे काम कर रहे हैं तो आबकारी विभाग द्वारा बाल न्यायालय एवं श्रम विभाग के सहयोग से कार्रवाई की जाएगी।

- शैलेष सिंह, सहायक आबकारी आयुक्त

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साक्ष्य उपलब्ध करा दें.....

'' श्रम विभाग ने रायरू डिस्टलरीज में फिलहाल ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है, लेकिन यदि साक्ष्य उपलब्ध कराए जातें हैं तो हम कार्रवाई करेंगे।

- आरएस यादव, सहायक श्रम आयुक्त

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हमने शिकायत की.....

'' रायरू डिस्टलरीज में बच्चों से काम कराए जाने को लेकर हमने अधिकारियों से शिकायतें की हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। अब इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा।

- दीपक सिंह धाकड़, जिला पंचायत सदस्य

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होती हैं बीमारियां.....

'' लगातार स्प्रिट के संपर्क में रहने से बच्चों को उल्टी, पेट दर्द, आंखों की रोशनी कम होना, बदहजमी, फैंफडों की शिकायत एवं निमोनिया की गंभीर बीमारियां होती हैं।

- डा. अजय पाल सिंह, एसोसिएट् प्रोफेसर मेडिसीन जीआरएमसी

1 comment:

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